April 30, 2026

सीट विवाद की अफवाहों के बीच बिहार NDA नेताओं का एक जैसा संदेश, दिखाई एकजुटता

बिहार विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रहे हैं, वैसे-वैसे सियासी हलचल तेज होती जा रही है. नामांकन की आखिरी तारीख 18 अक्टूबर तय है, लेकिन अब तक न तो एनडीए और न ही इंडिया गठबंधन में सीट बंटवारे का फैसला पूरी तरह हो पाया है. जहां महागठबंधन के नेताओं की सोशल मीडिया पर शायरी और दोहों से असहमति झलक रही है, वहीं एनडीए खेमे में भी सोमवार को उम्मीदवारों की सूची टलने के बाद अंदरूनी मतभेदों की चर्चा शुरू हो गई थी.

इसी पृष्ठभूमि में अब बिहार एनडीए के तमाम बड़े नेता एकजुटता दिखाने के लिए सोशल मीडिया पर एक जैसी पोस्ट कर रहे हैं. चिराग पासवान, उपेंद्र कुशवाहा और उपमुख्यमंत्री समराट चौधरी ने लगभग एक समान संदेश देते हुए यह दावा किया कि एनडीए में सीटों को लेकर बातचीत सौहार्दपूर्ण माहौल में पूरी हो चुकी है. उन्होंने लिखा कि कौन-सी पार्टी किस सीट से चुनाव लड़ेगी, यह चर्चा अब अंतिम दौर में है और सब कुछ सकारात्मक माहौल में आगे बढ़ रहा है.

चिराग पासवान ने अपने पोस्ट में कहा कि एनडीए के घटक दल पूरी मजबूती से एकजुट हैं और जल्द ही उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी जाएगी. वहीं आरएलएसपी के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा ने भी यही संदेश साझा करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए एकजुटता के साथ चुनाव मैदान में उतरने को तैयार है.

उपमुख्यमंत्री समराट चौधरी ने भी एक्स पर लिखा, “एनडीए दलों में सीट संख्या का विषय सौहार्दपूर्ण बातचीत में पूरा हो चुका है. कौन दल किस सीट पर लड़ेगा यह चर्चा भी सकारात्मक बातचीत के साथ अंतिम दौर में है. मोदी जी और नीतीश जी के नेतृत्व में एनडीए के सभी दल एकजुटता के साथ पूरी तरह से तैयार हैं.” नेताओं के इन समान संदेशों को देखकर साफ है कि एनडीए गठबंधन की ओर से किसी भी तरह की अंदरूनी खींचतान की खबरों को रोकने की रणनीति अपनाई जा रही है.

वहीं बिहार चुनाव आयोग के अनुसार, राज्य की 243 विधानसभा सीटों पर दो चरणों में मतदान होना है. पहले चरण की वोटिंग 6 नवंबर को और दूसरे चरण की 11 नवंबर को कराई जाएगी. नामांकन की अंतिम तारीख 18 अक्टूबर है, जबकि नाम वापस लेने की आखिरी तिथि 20 अक्टूबर तय की गई है. नतीजे 14 नवंबर को घोषित किए जाएंगे.

ऐसे में जब एनडीए की ओर से उम्मीदवारों की सूची जारी होने का इंतजार है, नेताओं की यह समन्वित सोशल मीडिया मुहिम यह संकेत देती है कि गठबंधन अंदरूनी मतभेदों की चर्चा को विराम देना चाहता है और चुनावी मैदान में एकजुटता का संदेश भेजना प्राथमिकता बना चुका है.

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