May 6, 2026

**हेडलाइन: बिहार की सियासत में शायरी का तड़का, चिराग पासवान के जीजा अनिल साधु ने गीत के जरिए साधा निशाना**

बिहार की सियासत इन दिनों एक अनोखे मोड़ पर है, जहां गठबंधनों की खींचतान के बीच शेरो-शायरी का दौर शुरू हो गया है। आगामी विधानसभा चुनाव के लिए सीट बंटवारे की बातचीत रुक-रुक कर चल रही है, और इस बीच नेताओं ने अपनी बात कहने के लिए सोशल मीडिया का सहारा लिया है। इस कड़ी में राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के नेता और लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) के प्रमुख चिराग पासवान के जीजा अनिल कुमार साधु ने देर रात एक फिल्मी शायरी पोस्ट की। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, “मेरे महबूब कयामत होगी, आज रुसवा तेरी गलियों में मोहब्बत होगी। मेरी नजरें तो गिला करती हैं, तेरे दिल को भी सनम तुझसे शिकायत होगी।” हालांकि, अनिल ने यह साफ नहीं किया कि यह शायरी किसके लिए है, लेकिन माना जा रहा है कि यह महागठबंधन में चल रही तनातनी का हिस्सा है।

महागठबंधन में आरजेडी और कांग्रेस के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर बातचीत अटकी हुई है। पहले चरण के नामांकन के लिए अब केवल चार दिन बचे हैं, और इस अनिश्चितता ने नेताओं के बीच बेचैनी बढ़ा दी है। न केवल महागठबंधन, बल्कि एनडीए में भी सीट बंटवारे को लेकर जोर-आजमाइश जारी है। ऐसे में नेता अपनी बात को शायरी और दोहों के जरिए सामने ला रहे हैं। अनिल साधु की यह शायरी उसी सिलसिले की एक कड़ी मानी जा रही है, जो आरजेडी नेता मनोज झा और कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी की हालिया पोस्ट्स से शुरू हुआ।

इससे पहले, सोमवार देर रात आरजेडी नेता मनोज झा ने सोशल मीडिया पर रहीम का एक दोहा पोस्ट किया, जिसमें उन्होंने बिना नाम लिए गठबंधन सहयोगियों को नसीहत देने की कोशिश की। उन्होंने लिखा, “रहिमन धागा प्रेम का, मत तोड़ो छिटकाय, टूटे से फिर न मिले, मिले गांठ परिजाय। हर अवसर के लिए प्रासंगिक… जय हिंद।” इसके जवाब में कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने भी शायरी का सहारा लिया और लिखा, “पानी आंख में भर कर लाया जा सकता है, अब भी जलता शहर बचाया जा सकता है।” अब अनिल साधु ने इसी सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए अपनी शायरी से सियासी माहौल को और गर्म कर दिया है।

अनिल कुमार साधु का सियासी सफर भी कम दिलचस्प नहीं है। वह चिराग पासवान के जीजा हैं और उनकी पत्नी आशा देवी, पूर्व केंद्रीय मंत्री राम विलास पासवान की पहली पत्नी राजकुमारी की बेटी हैं। अनिल ने अपनी राजनीतिक शुरुआत लोक जनशक्ति पार्टी से की थी, जहां उनके ससुर राम विलास पासवान ने उन्हें मुजफ्फरपुर की बोचहां विधानसभा सीट से टिकट दिया था। हालांकि, वह उस चुनाव में हार गए थे। राम विलास पासवान के निधन के बाद, पासवान परिवार में हुए विवाद के चलते अनिल ने लोक जनशक्ति पार्टी छोड़ दी और तेजस्वी यादव की राष्ट्रीय जनता दल में शामिल हो गए। वर्तमान में वह आरजेडी के अनुसूचित जाति सेल के प्रदेश अध्यक्ष हैं।

यह शायरी और दोहों का सिलसिला बिहार की सियासत में एक नया रंग ला रहा है। जहां एक तरफ गठबंधनों में तनाव और अनिश्चितता है, वहीं नेता अपनी बात को काव्यात्मक अंदाज में पेश कर रहे हैं। अनिल साधु की इस शायरी ने सियासी गलियारों में चर्चा को और तेज कर दिया है। सवाल यह है कि क्या यह शायरी केवल एक सियासी तंज है, या इसके पीछे कोई गहरी रणनीति छिपी है? आने वाले दिन शायद इस सवाल का जवाब दे सकें।

बिहार की जनता के लिए यह समय बेहद अहम है, क्योंकि पहले चरण के नामांकन की तारीख नजदीक आ रही है। गठबंधनों के बीच सीटों का बंटवारा और नेताओं की यह शायराना अदा सियासत को और भी रोचक बना रही है। अब देखना यह है कि क्या यह काव्यात्मक संदेश गठबंधन में चल रही खींचतान को सुलझाने में मदद करेंगे, या फिर यह सियासी जंग को और उलझाएंगे।

Share this content:

About The Author

error: Content is protected !!