April 30, 2026

क्या बांग्लादेश फिर सियासी आग में झुलसेगा? यूनुस की चुनावी घोषणा से उठा बवाल, शेख हसीना और बीएनपी दोनों नाराज़

बांग्लादेश की सियासत एक बार फिर बुरे दौर में है। ईद-उल-अजहा के मौके पर जब देश जश्न में डूबा था, उसी वक्त कार्यवाहक सरकार के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस ने टेलीविजन पर एक ऐलान कर दिया, जिसने राजनीतिक हलकों में भूचाल ला दिया। उन्होंने कहा कि देश में आम चुनाव अप्रैल 2026 के पहले पखवाड़े में कराए जाएंगे। लेकिन चुनाव की तारीख का कोई स्पष्ट ज़िक्र नहीं किया गया। यही नहीं, इस घोषणा के बाद राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं तेजी से सामने आने लगीं—और उनमें से अधिकांश नकारात्मक थीं।

बांग्लादेश नेशनल पार्टी (बीएनपी) और जमात-ए-इस्लामी जैसे प्रमुख विपक्षी दलों ने इस प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया है। इन दलों की मांग है कि चुनाव इस साल दिसंबर में कराए जाएं, क्योंकि अप्रैल में रमज़ान होगा, देश में स्कूल परीक्षाएं होंगी और मौसम भी अनुकूल नहीं रहेगा। वहीं पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने इस घोषणा पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि यूनुस की सरकार आतंकवादियों को संरक्षण दे रही है और बांग्लादेश को अराजकता की ओर धकेल रही है।

शेख हसीना का यह भी कहना है कि मोहम्मद यूनुस चुनाव कराने की नीयत ही नहीं रखते, बल्कि वे केवल देश को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं। उनका आरोप है कि बजट में कटौती हो रही है, संस्थाएं बर्बाद हो चुकी हैं और जनता त्रस्त है। उन्होंने इस अंतरिम सरकार को विदेशी हितों की कठपुतली बताते हुए देश को इससे मुक्त कराने की बात कही।

दूसरी ओर, बीएनपी ने यूनुस की घोषणा के बाद एक आपात बैठक बुलाई और साफ शब्दों में कहा कि मुख्य सलाहकार का ईद पर दिया गया भाषण केवल त्योहार तक सीमित नहीं था, बल्कि उसमें वह जनादेश से बाहर जाकर राजनीतिक मामलों पर भी बोले। बीएनपी का आरोप है कि जब 90% राजनीतिक दल दिसंबर में चुनाव चाहते हैं, तो बहुमत की अनदेखी कर कोई फैसला कैसे लिया जा सकता है?

पार्टी ने अब राष्ट्रव्यापी आंदोलन छेड़ने का ऐलान किया है और कहा है कि वे जनता का समर्थन जुटाकर इस प्रस्ताव को वापस करवाएंगे। बीएनपी यह भी कह रही है कि यदि चुनाव अप्रैल तक टाले गए तो इससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया को ठेस पहुंचेगी और जनता का विश्वास टूटेगा।

इस बीच, यूनुस लगातार घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दबावों से जूझ रहे हैं। वह हाल ही में चीन और जापान की यात्रा कर चुके हैं और अब ब्रिटेन व अमेरिका का दौरा करने की तैयारी में हैं। जानकारों का मानना है कि यूनुस वैश्विक समर्थन पाने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि अपनी सरकार की वैधता को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मज़बूत किया जा सके। लेकिन सवाल यह है कि जब देश के अंदर हालात बिगड़ रहे हों, सेना और विपक्ष दोनों दबाव बनाए हुए हों, तो क्या केवल विदेशी समर्थन से कोई सरकार स्थिर रह सकती है?

बांग्लादेश इस समय जिस दोराहे पर खड़ा है, वहां से हर रास्ता टकराव की ओर जाता है। अगर जल्द समाधान नहीं निकला, तो अप्रैल 2026 का चुनाव एक और संकट की वजह बन सकता है। अब देखना यह है कि मोहम्मद यूनुस विरोध की इस आंधी में कैसे टिकते हैं, और क्या बांग्लादेश एक शांतिपूर्ण चुनाव की ओर बढ़ पाएगा या फिर एक बार फिर सड़कों पर संघर्ष का मंजर लौटेगा।

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