गाजीपुर शहर में इन दिनों बंदरों का आतंक आम लोगों के लिए बड़ी मुसीबत बन गया है। रेलवे स्टेशन से लेकर रिहायशी कॉलोनियों और घनी आबादी वाले इलाकों तक बंदरों के हमलों से दहशत का माहौल है। बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। लगातार मिल रही शिकायतों के बाद नगर पालिका परिषद ने सख्त कदम उठाते हुए मथुरा से एक्सपर्ट रेस्क्यू टीम को बुलाया है, जो बीते तीन दिनों से शहर में अभियान चला रही है।
नगर पालिका द्वारा कराए गए रेस्क्यू टेंडर के बाद शुरू हुए इस अभियान में अब तक 342 बंदरों को पकड़ा जा चुका है। पकड़े गए सभी बंदरों को सुरक्षित रूप से सोनभद्र के जंगलों में छोड़ा गया है। फिलहाल सदर कोतवाली क्षेत्र के अष्टभुजी कॉलोनी में रेस्क्यू अभियान जारी है, जहां मथुरा की टीम लगातार बंदरों को पकड़ने में जुटी हुई है।
नगर पालिका परिषद के अधिशासी अधिकारी धीरेंद्र कुमार राय ने बताया कि गाजीपुर शहर में काफी समय से बंदरों के आतंक की शिकायतें मिल रही थीं। शहर का माहौल बंदरों के रहने के अनुकूल नहीं है, जिसकी वजह से वे आक्रामक हो रहे हैं और मोहल्लों में लोगों पर हमला कर रहे हैं। इसी कारण उन्हें शहर से बाहर सुरक्षित जंगलों में छोड़ा जा रहा है, ताकि आम जनता को राहत मिल सके।
नगर पालिका के अनुसार, एक बंदर को पकड़ने पर करीब ₹500 का खर्च आ रहा है और यह अभियान तब तक जारी रहेगा, जब तक शहर से सभी बंदरों को पकड़ नहीं लिया जाता। प्रशासन का दावा है कि रेस्क्यू अभियान पूरा होने के बाद गाजीपुर शहर में बंदरों के आतंक से लोगों को बड़ी राहत मिलेगी।
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