महिला सशक्तिकरण के लिए बेबी रानी मौर्य ने दिया बड़ा संदेश, कहा अब ‘वूमेंस डे’ नहीं, ‘वूमेंस पर्व’ मनाने की जरूरत”
उत्तर प्रदेश की महिला एवं बाल विकास मंत्री बेबी रानी मौर्य ने अमर उजाला की ओर से आयोजित ‘शक्ति की समृद्धि’ कार्यक्रम में महिलाओं के सशक्तिकरण और उनके आर्थिक स्वावलंबन पर अहम विचार साझा किए। उन्होंने इस अवसर पर महिलाओं को बचत और निवेश की अहमियत समझाते हुए कहा कि आज के समय में महिलाओं के लिए सिर्फ बचत करना ही काफी नहीं है, बल्कि निवेश की आदत डालने से वे और भी सशक्त और आत्मनिर्भर बन सकती हैं।
बेबी रानी मौर्य ने कहा, “महिलाओं में बचत की खास आदत होती है, लेकिन अगर वे इसके साथ निवेश की आदत भी डाल लें तो इसका उन्हें अधिक लाभ होगा। जीवन में कठिन परिस्थितियों का सामना करने के लिए बचत जरूरी है, और इससे महिलाएं अपनी आर्थिक स्थिति को और मजबूत बना सकती हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि महिलाएं अगर चाहें तो छोटे व्यवसायों की शुरुआत कर सकती हैं, जिससे न सिर्फ वे अपने परिवार का भरण-पोषण कर सकेंगी, बल्कि खुद को भी आर्थिक रूप से स्वतंत्र बना सकेंगी।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा, “मैंने देखा कि एक महिला अपनी बेटी के बारे में कह रही थी कि वह उसे डॉक्टर बनाएगी। मैंने सोचा कि इसके लिए उसने बचत करना शुरू कर दिया होगा।” इसके साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बचत के साथ निवेश का महत्व बहुत अधिक है और यह महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में मदद करेगा।
बेबी रानी मौर्य ने कार्यक्रम में अमर उजाला की पहल, ‘बोनस पत्रिका’ की भी सराहना की, जो महिलाओं को वित्तीय साक्षरता और आर्थिक योजना के बारे में जानकारी देने का काम करेगी। उन्होंने कहा, “महिलाओं को घर के वित्तीय मामलों में शामिल नहीं किया जाता, लेकिन आज हमें बुरे वक्त के लिए वित्तीय योजना बनानी चाहिए।” वे यह भी याद करती हैं कि बचपन में उनके दादा जी हमेशा कहते थे, “मोटा खाओ, मोटा पहनो, वक्त के लिए बचाकर रखो,” और यह पुस्तक उसी दिशा में एक कदम है।
उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा, “हमारे पास कभी पैसे नहीं होते थे और उस समय हम यही सोचते थे कि अगर बचत होती तो बेहतर होता। अब महिलाएं अपनी बचत से न केवल अपने परिवार को आर्थिक सुरक्षा दे सकती हैं, बल्कि वे अपने बच्चों को भी बेहतर शिक्षा और करियर प्रदान कर सकती हैं।”
बेबी रानी मौर्य ने आगे कहा, “जब महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर होती हैं तो उनमें आत्मविश्वास आता है। जब मेरी पहली नौकरी लगी, तब मुझे बहुत आत्मविश्वास मिला था।” उन्होंने महिलाओं को यह संदेश दिया कि सबसे पहले उन्हें आत्मनिर्भर बनना होगा, और फिर अपनी आमदनी का सही तरीके से निवेश करने के लिए वित्तीय योजना बनानी चाहिए।
साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि एक देश तभी सशक्त हो सकता है जब उसकी नारी सशक्त हो। “आज महिलाएं हर क्षेत्र में आगे आ रही हैं। अब हमें सिर्फ ‘वूमेंस डे’ नहीं, बल्कि ‘वूमेंस पर्व’ मनाने की जरूरत है।”
बेबी रानी मौर्य ने इस कार्यक्रम में उपस्थित महिलाओं को यह प्रेरणा दी कि वे केवल अपनी और अपने परिवार की वित्तीय स्थिति मजबूत न करें, बल्कि समाज में अपनी एक मजबूत पहचान बनाएं और हर क्षेत्र में अपनी मौजूदगी दर्ज कराएं।
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