अमेरिका ने सीरिया की राजधानी दमिश्क में नया सैन्य अड्डा बनाने की तैयारी शुरू कर दी है, जिससे मिडिल ईस्ट में उसका प्रभाव और मजबूत होता दिख रहा है. यह कदम ईरान के लिए गहरी रणनीतिक चिंता का विषय बन गया है, क्योंकि अमेरिका पहले से ही बहरीन, जॉर्डन, यूएई, कुवैत, कतर, सऊदी अरब और इराक जैसे देशों में अपने सैनिक तैनात कर चुका है. अब सीरिया में भी अमेरिकी उपस्थिति बढ़ने से ईरान लगभग चारों तरफ से अमेरिकी घेरे में आ गया है.
दमिश्क में बनने वाला यह नया बेस इजराइल-सीरिया के बीच संभावित शांति समझौते की निगरानी के लिए इस्तेमाल किया जाएगा. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस समझौते को कराने की कोशिश कर रहे हैं और इसके लिए वह जल्द ही सीरिया के राष्ट्रपति अहमद अल-शरा से मिलने वाले हैं. माना जा रहा है कि इस समझौते के जरिए अमेरिका सीधे मिडिल ईस्ट की राजनीति को प्रभावित करने की दिशा में बड़ा कदम उठा रहा है.
सीरियाई रक्षा सूत्रों का कहना है कि अमेरिकी सैनिकों की तैनाती से पहले सी-130 सैन्य विमान के जरिए बेस की रनवे जांच की गई है. अमेरिका फिलहाल उत्तर-पूर्वी सीरिया में पहले से तैनात सैनिकों के साथ कुर्द बलों की मदद से ISIS के खिलाफ अभियान चला रहा है. हालांकि अब दमिश्क में अमेरिकी अड्डे की तैयारी यह दिखाती है कि वाशिंगटन न केवल आतंकवाद विरोधी रणनीति पर काम कर रहा है, बल्कि ईरान और उसके सहयोगियों को पूरी तरह घेरने की दिशा में भी बढ़ रहा है.
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