फरीदाबाद में गिरफ्तार आतंकी अब्दुल रहमान ने रची राम मंदिर उड़ाने की साजिश, खुलासा—आईएसआई से जुड़े होने का दावा
नई दिल्ली, 4 मार्च 2025: राजधानी दिल्ली से सटे फरीदाबाद में गिरफ्तार आतंकवादी अब्दुल रहमान ने एक खतरनाक साजिश का खुलासा किया है। इस साजिश के तहत, वह राम मंदिर को उड़ाने का प्लान बना रहा था। पुलिस की कार्रवाई से पहले उसे दो हैंड ग्रेनेड भी उपलब्ध कराए गए थे, लेकिन गुजरात एटीएस और हरियाणा एसटीएफ की संयुक्त टीम ने उसे पकड़कर इस बड़े आतंकी हमले को नाकाम कर दिया।
आतंकी अब्दुल रहमान ने अपनी गिरफ्तारी के बाद पुलिस को बताया कि वह 10 महीने पहले आतंकवादी संगठन इस्लामिक स्टेट खुरासान प्रोविंस (ISKP) के संपर्क में आया था। उसने खुलासा किया कि उसे इस साजिश को अंजाम देने के लिए ऑनलाइन वीडियो कॉल पर प्रशिक्षण दिया गया था, और पूरी योजना उसी माध्यम से बनाई गई थी।
ऑनलाइन ट्रेनिंग और खतरनाक साजिश
अब्दुल रहमान ने बताया कि वह अपनी दुकान पर बैठकर वीडियो कॉल पर आतंकवादी गतिविधियों की ट्रेनिंग लिया करता था। इसके दौरान उसे कई कार्य सौंपे गए थे, जिनमें राम मंदिर को उड़ाने की साजिश भी शामिल थी। अब्दुल के मोबाइल फोन से धार्मिक स्थलों की तस्वीरें और वीडियो भी बरामद किए गए हैं, जो इस बात का प्रमाण हैं कि वह इन स्थलों पर हमला करने की योजना बना रहा था।
फरीदाबाद में गिरफ्तार होने से पहले, अब्दुल ने अपने परिवार से कहा था कि वह दिल्ली स्थित मरकज जा रहा है। हालांकि, वह फरीदाबाद पहुंचा और वहां अपने नाम से पहचान बदलकर रह रहा था। पुलिस को यह भी जानकारी मिली है कि अब्दुल ने 10वीं तक ही पढ़ाई की थी, लेकिन आतंकी संगठन से जुड़ने के बाद उसकी दिशा पूरी तरह बदल गई।
राम मंदिर पर हमले का सामान मिल चुका था
अब्दुल रहमान ने जांच एजेंसियों के सामने यह भी खुलासा किया कि उसे राम मंदिर पर हमले के लिए आवश्यक सामान मिल चुका था, लेकिन उसे सही मौका मिलने तक फरीदाबाद में रहकर योजना को आगे बढ़ाने के निर्देश दिए गए थे। पुलिस अब यह जांच कर रही है कि इस साजिश में अब्दुल के अलावा अन्य लोग भी शामिल थे। अब्दुल को अदालत में पेश कर 10 दिन की कस्टडी रिमांड पर लिया गया है, ताकि उसकी और पूछताछ की जा सके और आतंकवादी नेटवर्क का पता चल सके।
पाकिस्तान और कट्टरपंथी समूहों से संपर्क
अब्दुल रहमान का संबंध पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI से होने का भी दावा किया गया है। पुलिस एजेंसियों के मुताबिक, अब्दुल कई कट्टरपंथी संगठनों से भी जुड़ा हुआ था और वह लंबे समय से इन नेटवर्क्स का हिस्सा था। अयोध्या के मंजनाई गांव का रहने वाला अब्दुल पहले रिक्शा चलाता था। उसके पिता ने बताया कि उनका बेटा कुछ दिन पहले दिल्ली में जमात में शामिल होने गया था, लेकिन अब उसकी गिरफ्तारी की खबर ने पूरे परिवार को झकझोर दिया है।
गिरफ्तारी के बाद, अयोध्या पुलिस ने अब्दुल के परिवार को भी हिरासत में लिया था, हालांकि बाद में पूछताछ के बाद उन्हें छोड़ दिया गया। अब पुलिस पूरी तरह से इस मामले की तहकीकात कर रही है, और आतंकवादी गतिविधियों में अब्दुल के साथ जुड़ी और जानकारी जुटाने की कोशिश कर रही है।
क्या अब्दुल रहमान के खुलासे से बड़ा आतंकी नेटवर्क बेनकाब होगा?
अब्दुल रहमान की गिरफ्तारी के बाद सवाल उठ रहा है कि क्या उसकी जानकारी से जुड़े और भी आतंकी नेटवर्क और साजिशों का पर्दाफाश होगा? पुलिस को अब्दुल के अन्य सहयोगियों की तलाश है, और यह देखना होगा कि जांच के बाद क्या और बड़े सुराग सामने आते हैं, जिससे इस खतरनाक साजिश के पीछे के मुख्य आरोपी और उनके नेटवर्क की पहचान की जा सके।
यह मामला इस बात का प्रतीक बन चुका है कि आतंकवादी गतिविधियों में संलिप्त लोग किस हद तक चुपचाप अपनी योजनाओं को अंजाम देने की कोशिश कर रहे हैं, और हमारे सुरक्षा तंत्र को ऐसे खतरों का पता लगाने के लिए और अधिक सतर्क रहने की आवश्यकता है।
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