लखनऊ के गोमती नगर में सार्वजनिक नाली पर कब्जे का आरोप, नगर निगम और एलडीए की भूमिका पर उठे सवाल

लखनऊ। राजधानी लखनऊ के गोमती नगर स्थित विनय खंड-2 में सार्वजनिक नाली पर कथित कब्जे का मामला सामने आया है। जहां मकान संख्या 2/753 के पास नाली के रास्ते में बदलाव कर उसे घर के अंदर शामिल किए जाने का आरोप लगाया गया है। इस मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर सवाल उठ रहे हैं कि यदि सार्वजनिक नाली पर अतिक्रमण किया गया है, तो संबंधित विभागों की ओर से अब तक क्या कार्रवाई की गई है। मामले में क्षेत्रीय पार्षद, नगर निगम और लखनऊ विकास प्राधिकरण के अधिकारियों एवं कर्मचारियों की कथित मिलीभगत को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों की वास्तविकता की पुष्टि संबंधित विभागों की जांच के बाद ही हो सकेगी।

मौके की तस्वीरों में निर्माण स्थल पर खुदाई, टूटी हुई ईंटें और मकान के किनारे नाली से जुड़ी संरचना दिखाई दे रही है। आरोप है कि सार्वजनिक नाली के मूल रास्ते में बदलाव किए जाने से क्षेत्र की जल निकासी व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। यदि नाली पर अतिक्रमण की पुष्टि होती है, तो बारिश के दौरान पानी की निकासी में परेशानी आने के साथ आसपास रहने वाले लोगों को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में नाली की वास्तविक स्थिति, निर्माण की प्रकृति और संबंधित भूमि के सार्वजनिक उपयोग से जुड़े तथ्यों की जांच कराया जाना जरूरी है, ताकि स्थिति स्पष्ट हो सके और किसी भी संभावित समस्या का समय रहते समाधान किया जा सके।

नगर निगम और एलडीए की भूमिका की निष्पक्ष जांच की मांग

मामले में संबंधित विभागों की भूमिका को लेकर निष्पक्ष जांच कराने की मांग उठ रही है। स्थानीय प्रशासन, नगर निगम और एलडीए के अधिकारियों को मौके का निरीक्षण कर नाली की मौजूदा स्थिति, निर्माण की वैधता और सार्वजनिक भूमि पर संभावित अतिक्रमण की जांच करनी चाहिए। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए कि संबंधित निर्माण के लिए आवश्यक अनुमति ली गई है या नहीं और यदि नाली के रास्ते में बदलाव किया गया है, तो वह किन परिस्थितियों में हुआ। जांच के दौरान सभी संबंधित पक्षों का पक्ष लेकर तथ्यों के आधार पर कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि किसी भी व्यक्ति या विभाग पर लगाए गए आरोपों की निष्पक्षता से पड़ताल हो सके।

सबसे बड़ा सवाल, सार्वजनिक नाली पर कब्जा हुआ तो अब तक कार्रवाई क्यों नहीं ?

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि सार्वजनिक नाली पर कब्जा किया गया है, तो जिम्मेदार विभागों ने अब तक क्या कार्रवाई की है? क्या क्षेत्रीय पार्षद और संबंधित अधिकारियों को इस कथित अतिक्रमण की जानकारी है? यदि जानकारी थी, तो मौके का निरीक्षण कर नियमानुसार कदम क्यों नहीं उठाए गए? फिलहाल इन सवालों के जवाब संबंधित विभागों की जांच और आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेंगे। ऐसे में जरूरी है कि मामले को गंभीरता से लेते हुए नाली की निष्पक्ष जांच कराई जाए, अतिक्रमण की पुष्टि होने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए और सार्वजनिक जल निकासी मार्ग को बहाल कराया जाए, ताकि आसपास के निवासियों को भविष्य में किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।

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