चार जिलों के आठ कॉलेजों में एक साथ नौकरी, हर जगह से उठाते रहे मोटी सैलरी – मास्टर साहब का पर्दाफाश
उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले से सामने आया एक हैरान करने वाला मामला शिक्षा व्यवस्था की बड़ी चूक को उजागर करता है। यहां रहने वाले दिनेश कुमार नामक शिक्षक पर आरोप है कि उसने मेरठ, गाजियाबाद, सहारनपुर और हरियाणा के पानीपत में मौजूद आठ अलग-अलग कॉलेजों और स्कूलों में एक साथ नौकरी की, और हर संस्थान से नियमित वेतन भी लेता रहा।
इस फर्जीवाड़े का खुलासा तब हुआ जब मेरठ के अटलांटिस कॉलेज की कार्यवाहक अध्यक्ष पूनम शर्मा ने कोर्ट में एक याचिका दायर की। उन्होंने आरोप लगाया कि दिनेश कुमार ने झूठे शपथ पत्रों के जरिए कॉलेज में नियुक्ति ली है और इसी तरह अन्य संस्थानों में भी खुद को नियुक्त कर रखा है। कोर्ट ने शिकायत को गंभीर मानते हुए सरधना थाने को आदेश दिया कि आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की जाए। इसके बाद पुलिस ने शिक्षक दिनेश कुमार पर विभिन्न धाराओं में एफआईआर दर्ज कर ली है।
जांच में सामने आया कि दिनेश कुमार न सिर्फ मेरठ के चार अलग-अलग कॉलेजों में नौकरी कर रहा था, बल्कि गाजियाबाद और सहारनपुर में एक-एक तथा हरियाणा के पानीपत में दो संस्थानों में भी वह पढ़ा रहा था। सभी जगहों पर उसने शपथ पत्र में गलत जानकारियां दीं और अपनी उपस्थिति सुनिश्चित कर वेतन हासिल करता रहा।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस दौरान वह अपनी पढ़ाई भी जारी रखे हुए था और बिना किसी अवकाश के एमएससी की डिग्री भी प्राप्त कर ली। सवाल यह भी उठता है कि किसी भी संस्थान ने इतनी बड़ी अनियमितता पर संज्ञान क्यों नहीं लिया?
प्रत्येक कॉलेज से उसे अच्छी-खासी सैलरी मिल रही थी और कुल मिलाकर महीने भर में वह लाखों रुपये की आमदनी कर रहा था। इस मामले ने शिक्षा विभाग के निरीक्षण तंत्र पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
फिलहाल पुलिस ने मामले की गहन जांच शुरू कर दी है और आरोपी शिक्षक की गतिविधियों से संबंधित सभी दस्तावेजों को खंगाला जा रहा है। संभावना जताई जा रही है कि यह घोटाला केवल यहीं तक सीमित नहीं है और कई और नाम सामने आ सकते हैं।
यह पूरा मामला इस बात का संकेत है कि शैक्षणिक संस्थानों में नियुक्ति और उपस्थिति को लेकर निगरानी की व्यवस्था कितनी कमजोर है। यदि कोर्ट में शिकायत न होती, तो शायद यह घोटाला वर्षों तक यूं ही चलता रहता।
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