इमरान मसूद की सियासी बयानबाज़ी से अखिलेश यादव की मुस्लिम पॉलिटिक्स में मचा घमासान, सपा-कांग्रेस में बढ़ी तल्ख़ी
उत्तर प्रदेश की राजनीति में सपा और कांग्रेस के बीच रिश्तों में दरार गहराती जा रही है। ताजा विवाद की वजह बने हैं कांग्रेस सांसद इमरान मसूद, जिन्होंने समाजवादी पार्टी की मुस्लिम राजनीति पर तीखा हमला बोला है। मसूद ने यहां तक कह दिया कि सपा को बोलने वाले मुसलमान नहीं, सिर्फ दरी बिछाने वाले चाहिए। उनके इस बयान से सियासी भूचाल आ गया है और सपा की ओर से पलटवार करते हुए उन्हें बीजेपी का स्लीपर सेल करार दिया गया है।
यह तकरार ऐसे समय में सामने आई है जब 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों में दोनों दल जुटे हुए हैं। इमरान मसूद सहारनपुर से कांग्रेस सांसद हैं और मुस्लिम राजनीति में खुद को मजबूत चेहरा बनाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने सपा विधायक आशु मलिक के खिलाफ तो पहले ही मोर्चा खोला था, अब अखिलेश यादव की मुस्लिम नीति को भी आड़े हाथों ले लिया है। मसूद ने कहा कि सपा की नीति मुसलमानों को वोट बैंक समझने की है, लेकिन अब कांग्रेस बराबरी की राजनीति करेगी, न कि 17-80 के फॉर्मूले पर चलेगी।
सपा सांसद राजीव राय ने इमरान मसूद पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वह कांग्रेस के अधिकृत प्रवक्ता भी नहीं हैं और सपा के समर्थन से चुनाव जीतकर अब उल्टा बोल रहे हैं। उन्होंने मसूद को बीजेपी का एजेंट और स्लीपर सेल बताया। इसके जवाब में इमरान ने कहा कि सपा मुस्लिम मुद्दों पर हमेशा चुप रहती है और जो आवाज़ उठाता है, उसे बीजेपी समर्थक बताकर चुप कराने की कोशिश की जाती है।
इमरान मसूद ने आजम खान, इरफान सोलंकी, कादिर राणा जैसे मुस्लिम नेताओं की उपेक्षा और उत्पीड़न के उदाहरण देकर सपा को कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि जब मुस्लिमों ने सपा को वोट दिया, तब सरकार नहीं बनी, लेकिन उसकी कीमत मुसलमानों को भुगतनी पड़ी।
उन्होंने अखिलेश यादव के पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले पर भी सवाल उठाते हुए पूछा कि इसमें मुसलमान कहां हैं? सिर्फ वोट की जरूरत है या अधिकार भी दिए जाएंगे?
इस पूरे विवाद ने न सिर्फ सपा-कांग्रेस गठबंधन को असहज कर दिया है बल्कि मुस्लिम वोटों की दिशा और दलों की रणनीति पर बड़ा असर डाल सकता है। यूपी की 143 सीटों पर मुस्लिम वोटर निर्णायक भूमिका में हैं और यही वजह है कि दोनों पार्टियां इस वोट बैंक पर पकड़ बनाए रखना चाहती हैं। ऐसे में इमरान मसूद के बयानों ने न सिर्फ सपा की मुस्लिम पॉलिटिक्स की जड़ें हिला दी हैं, बल्कि कांग्रेस की रणनीति में भी नया मोड़ ला दिया है।
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