52 साल पुराना विवाद खत्म: सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, घर गिराने पर नाराजगी और मुआवजे का आदेश

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार और निजी फर्म के बीच 52 साल से चल रहे कानूनी विवाद पर अंतिम फैसला सुनाते हुए ब्याज दरों में संशोधन किया और उचित मुआवजा देने का आदेश दिया। साथ ही, प्रयागराज में बिना उचित प्रक्रिया अपनाए घरों को गिराने की कार्रवाई को “अमानवीय और गैरकानूनी” करार दिया और पीड़ितों को मुआवजा देने का निर्देश दिया।

ब्याज पर सुप्रीम कोर्ट का आदेश

शीर्ष अदालत ने राजस्थान सरकार को आदेश दिया कि वह 8 जुलाई 1975 से डिक्री की तारीख तक छह प्रतिशत साधारण ब्याज का भुगतान करे और डिक्री तिथि से भुगतान प्राप्ति तक नौ प्रतिशत प्रति वर्ष ब्याज दे। कोर्ट ने कहा कि राजस्थान सरकार दो महीने के भीतर बढ़ी हुई मूल्यांकन राशि का भुगतान करे।

52 साल पुराना मामला

यह विवाद 1973 में दायर एक मुकदमे से जुड़ा है, जिसमें राजस्थान राज्य खान और खनिज लिमिटेड के शेयरों का मूल्यांकन विवादित था। सुप्रीम कोर्ट ने निजी फर्म की ब्याज बढ़ाने की अपील पर सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि अदालतें उचित परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए ब्याज दरें तय कर सकती हैं।

प्रयागराज में बुलडोजर कार्रवाई पर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती

सुप्रीम कोर्ट ने प्रयागराज में बुलडोजर से घर गिराने की कार्रवाई को लेकर कड़ी नाराजगी जताई और कहा कि यह “हमारी आत्मा को झकझोर देने वाली घटना” है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि न्यायिक प्रक्रिया के बिना किसी का आश्रय छीना नहीं जा सकता।

पीड़ितों को मिलेगा 10-10 लाख का मुआवजा

सुप्रीम कोर्ट ने प्रयागराज विकास प्राधिकरण को आदेश दिया कि छह सप्ताह के भीतर छह पीड़ित परिवारों को 10-10 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए, जिनके घर मार्च 2021 में अवैध निर्माण के नाम पर गिरा दिए गए थे।

अदालतों को ब्याज दर तय करने का अधिकार

न्यायमूर्ति जेबी पार्डीवाला और न्यायमूर्ति आर महादेवन की पीठ ने 32 पन्नों के फैसले में स्पष्ट किया कि अदालतों के पास हर मामले के तथ्यों के आधार पर ब्याज दर तय करने का अधिकार है।

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