बांग्लादेश हाईकोर्ट ने बुधवार को उल्फा के सैन्य कमांडर परेश बरुआ की सजा में बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने उन्हें दिए गए आजीवन कारावास की सजा को घटाकर 14 साल कर दिया है। इससे पहले, बांग्लादेश कोर्ट ने 2004 में असम में हुए हथियारों की तस्करी के मामले में बरुआ की मौत की सजा को रद्द कर दिया था और उसे आजीवन कारावास में बदल दिया था। कोर्ट ने यह निर्णय दिया, जबकि बरुआ की अनुपस्थिति में यह सजा सुनाई गई थी, और माना जाता है कि वह फिलहाल चीन में रह रहे हैं।

 

बांग्लादेश उच्च न्यायालय ने इस फैसले में कहा कि मामले में आरोपित अभियोजन पक्ष इन मामलों में लगाए गए आरोपों को साबित करने में सफल नहीं हो सका था, विशेष रूप से आरोपियों द्वारा हथियारों का वास्तविक नियंत्रण और कब्जे का। इस फैसले से पूर्व गृह राज्य मंत्री लुत्फुज्जमां बाबर सहित अन्य पांच आरोपियों को भी बरी किया गया, जिनकी सजा भी घटाई गई थी। 2004 में हुए इस हथियार तस्करी कांड में 27,000 से अधिक ग्रेनेड, 150 रॉकेट लांचर और लाखों गोलियां जब्त की गई थीं।

 

यह मामला बांग्लादेश के चटगांव से पूर्वोत्तर भारत में उल्फा के ठिकानों तक हथियारों की तस्करी से जुड़ा है, और कोर्ट ने दोषसिद्धि और सजा को केवल विश्वसनीय सबूतों के आधार पर तय करने की बा

त की।

 

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