धूल भरी आंधी, हवा की तेज़ रफ्तार और आसमान में फंसा एक विमान..
इंडिगो की फ्लाइट 6E 6313 के यात्रियों के लिए रविवार की शाम कभी न भूलने वाली बन गई, जब दिल्ली एयरपोर्ट पर लैंडिंग से पहले विमान गंभीर एयर टर्बुलेंस में फंस गया। हवा की रफ्तार 80 किमी प्रति घंटा थी और आसमान में मंडराता था डर…”
रायपुर से दिल्ली आ रही इंडिगो की यह फ्लाइट अचानक धूल भरी आंधी की चपेट में आ गई। जैसे ही विमान दिल्ली के आसमान में पहुंचा, तेज़ हवाएं और मौसम की मार ने स्थिति को जटिल बना दिया। लैंडिंग के ठीक पहले हालात बिगड़ते देख पायलट ने तुरंत विमान को ऊपर उठाया और काफी देर तक आसमान में मंडराते हुए सही वक्त का इंतजार किया।
पायलट की सूझबूझ और अनुभव के चलते किसी तरह फ्लाइट को सुरक्षित लैंड करा दिया गया, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम के दौरान यात्रियों में दहशत का माहौल था। सीट बेल्ट्स की चेतावनियां लगातार बज रही थीं और विमान झटकों से हिल रहा था। एक यात्री द्वारा रिकॉर्ड किया गया वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल है, जिसमें साफ देखा जा सकता है कि किस तरह टर्बुलेंस ने यात्रियों को डरा दिया।
दिल्ली में उस वक्त तेज़ आंधी चल रही थी, जिससे न सिर्फ विमान का संतुलन बिगड़ा बल्कि लैंडिंग में भी देरी हुई। फ्लाइट के पायलट ने जब देखा कि मौसम अनुकूल नहीं है, तो उन्होंने विमान को हवा में बनाए रखा और जैसे ही स्थितियां कुछ सामान्य हुईं, तब जाकर सुरक्षित लैंडिंग कराई।
यह पहली बार नहीं है जब इंडिगो का विमान एयर टर्बुलेंस में फंसा हो। 21 मई 2025 को श्रीनगर से दिल्ली आ रही एक फ्लाइट भी ओलावृष्टि और मौसम के खराब हालात की वजह से संकट में आ गई थी। उस समय फ्लाइट के नोज़ रेडोम को नुकसान हुआ था, और विमान को इमरजेंसी ‘PAN PAN’ कॉल देकर सुरक्षित लैंड कराया गया था। उस घटना में ऑटोपायलट फेल हो गया था और पायलट को मैन्युअली विमान को नियंत्रित करना पड़ा था।
क्या होता है एयर टर्बुलेंस?
एयर टर्बुलेंस दरअसल हवाई यात्रा के दौरान अचानक और अनियमित झटकों को कहा जाता है। यह कई कारणों से हो सकता है, जैसे ऊपरी वायुमंडल में तेज़ हवाएं, गरज वाले बादल (Cumulonimbus), ओलावृष्टि या हवा की दिशा में अचानक बदलाव। इसकी तीव्रता कम या बहुत ज्यादा हो सकती है, और कई बार ये बिल्कुल अचानक आता है। यही कारण है कि हर उड़ान में यात्रियों को सीट बेल्ट बांधे रखने की सलाह दी जाती है।
तो अगली बार जब आप फ्लाइट में हों, तो ध्यान रखें – मौसम चाहे जैसा हो, सुरक्षा नियमों को हल्के में न लें।
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