सिर्फ कदमों की दूरी पर ईरान का ‘परमाणु धमाका’? IAEA रिपोर्ट से मचा हड़कंप, अमेरिका-इजरायल में बेचैनी!
एक बार फिर दुनिया की नजरें ईरान पर टिक गई हैं। संयुक्त राष्ट्र की परमाणु निगरानी संस्था IAEA (International Atomic Energy Agency) की एक हालिया रिपोर्ट ने वैश्विक हलकों में हलचल मचा दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने गुपचुप तरीके से 408.6 किलोग्राम यूरेनियम को 60% तक समृद्ध कर लिया है—यह स्तर हथियार-ग्रेड (90%) के बेहद करीब है। इससे यह अंदेशा गहराता जा रहा है कि अब तेहरान अपने विवादास्पद परमाणु कार्यक्रम को किसी निर्णायक मोड़ पर ले जा सकता है।
9 परमाणु बम बना सकता है ईरान?
ब्रिटिश अखबार The Sun के मुताबिक, 42 किलोग्राम 90% समृद्ध यूरेनियम एक परमाणु बम के लिए पर्याप्त होता है। यदि ईरान अपने मौजूदा यूरेनियम को हथियार-ग्रेड स्तर तक समृद्ध कर लेता है, तो नौ परमाणु बम तैयार किए जा सकते हैं। यह अनुमान चौंकाने वाला है और सीधे-सीधे अमेरिका, इजरायल और पश्चिमी देशों के लिए एक रणनीतिक संकट का संकेत देता है।
IAEA की चेतावनी और अमेरिका की चिंता
IAEA के महानिदेशक राफेल ग्रॉसी ने साफ कहा है कि ईरान अब एक सफल परमाणु परीक्षण को अंजाम देने से “बहुत दूर नहीं” है। यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु वार्ता एक बार फिर अनिश्चितता में लटक गई है। अमेरिकी खुफिया एजेंसियों का आकलन है कि ईरान ने अब तक कोई सक्रिय हथियार कार्यक्रम शुरू नहीं किया है, लेकिन उसकी क्षमता और तैयारी पर अब सवाल नहीं, बल्कि चिंता जताई जा रही है।
इजरायल की चेतावनी और संभावित टकराव
इजरायल लंबे समय से ईरान के परमाणु इरादों को संदेह की नजर से देखता रहा है। अब इस रिपोर्ट के बाद तेल अवीव का आक्रामक रुख और तेज हो गया है। इजरायली नेतृत्व ने एक बार फिर दोहराया है कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम “शांतिपूर्ण नहीं” बल्कि “रणनीतिक और सैन्य उद्देश्य” से प्रेरित है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ईरान हथियार निर्माण की दिशा में निर्णायक कदम उठाता है तो मध्य पूर्व में एक बड़ा सैन्य टकराव भी हो सकता है।
भविष्य की दिशा और वैश्विक प्रतिक्रिया
IAEA की रिपोर्ट के मुताबिक, फरवरी से अब तक ईरान के समृद्ध यूरेनियम भंडार में 953.2 किलोग्राम की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो अब कुल मिलाकर 9,247.6 किलोग्राम हो चुका है। यह वृद्धि 50% से अधिक है, और इसे केवल एक तकनीकी गतिविधि नहीं, बल्कि रणनीतिक संकेतक माना जा रहा है।
अब सवाल यह है कि क्या वैश्विक कूटनीति ईरान को रोकेगी या दुनिया को एक और परमाणु संकट के लिए तैयार रहना चाहिए? फिलहाल, तेहरान की खामोशी और पश्चिम की बेचैनी मिलकर एक सस्पेंस भरे भू-राजनीतिक अध्याय को जन्म दे रहे हैं।
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