इंडिगो एयरलाइंस पिछले एक हफ्ते से गंभीर परिचालन संकट का सामना कर रही है, और अब पायलटों ने सीधे-सीधे मैनेजमेंट पर आरोप लगाकर इस पूरे मामले को और गरमा दिया है। पायलटों का कहना है कि यह संकट किसी तकनीकी या वास्तविक स्टाफ की कमी के कारण नहीं, बल्कि जानबूझकर पैदा किया गया है ताकि सरकार द्वारा लागू किए गए बदले हुए फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन (FDTL) नियमों को वापस करवाया जा सके। पायलटों के अनुसार, नए सेफ्टी नियमों को लागू करने में मैनेजमेंट न केवल अनिच्छुक है बल्कि व्यवस्थित तरीके से बाधाएं भी डाली जा रही हैं, जिससे यात्रियों की मुश्किलें बढ़ी हैं और देशभर में उड़ानों की समय-सारणी पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गई है।
देश के कई प्रमुख एयरपोर्ट्स पर पिछले सात दिनों से फ्लाइट संचालन बुरी तरह प्रभावित है। कुछ यात्रियों को घंटों इंतजार करना पड़ा तो कई को अपनी उड़ानें रद्द होने के कारण वैकल्पिक यात्रा ढूंढ़नी पड़ी। पायलटों का दावा है कि यह स्थिति स्वाभाविक रूप से नहीं बनी, बल्कि इसे इसलिए पैदा किया गया ताकि नए नियमों के खिलाफ दबाव बनाया जा सके। उनका कहना है कि अगर इंडिगो रोजाना लगभग 2,200 उड़ानें संचालित करती है और सिर्फ 65 कैप्टन और 59–212 फर्स्ट ऑफिसर्स की उपलब्धता से फर्क पड़ रहा है, तो यह अधिकतम 5-7% ही फ्लाइट ऑपरेशन को प्रभावित कर सकता है—हजारों उड़ानें कैंसल होना किसी वास्तविक कमी का संकेत नहीं देता।
एयरलाइन पायलट्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ALPAI) के प्रेसिडेंट साग्निक बनर्जी ने भी गंभीर चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि एयरलाइंस अक्सर मुनाफे को प्राथमिकता देती हैं और पायलटों की सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं को नजरअंदाज कर देती हैं। उन्होंने बताया कि नए FDTL नियम स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) का हिस्सा हैं, जिन्हें पायलटों की थकान घटाने और सुरक्षा को बेहतर बनाने के लिए तैयार किया गया था। लेकिन इंडिगो मैनेजमेंट इन नियमों को लागू करने में देरी कर रहा है, जिससे न केवल पायलटों की कार्यस्थिति बिगड़ रही है, बल्कि उड़ानों का संचालन भी अनावश्यक रूप से बाधित हो रहा है।
कई पायलटों ने यह भी खुलासा किया कि उन्हें स्टैंडबाय कॉल ड्यूटी के दौरान आमतौर पर 8-10 घंटे पहले सूचना मिलती है, लेकिन पिछले कुछ दिनों में यह कॉल मात्र 1-2 घंटे पहले आने लगी, जिससे रिपोर्टिंग में भी देरी हुई। वहीं, कुछ एयरपोर्ट्स पर विमानों को सामान्य से 60 किमी दूर पार्क करने जैसे कदम उठाए गए, जिससे क्रू के ट्रांजिट समय में अनावश्यक विलंब हुआ। पायलटों का कहना है कि इन सबका उद्देश्य संचालन में अव्यवस्था बढ़ाना और इसे “स्टाफ की कमी” जैसा दिखाना था, जबकि वास्तविक समस्या मैनेजमेंट का रवैया है।
अब इस पूरे विवाद में DGCA भी सक्रिय हो गई है। नियामक संस्था ने इंडिगो से 24 घंटे के भीतर विस्तृत जवाब मांगा है और चेतावनी दी है कि यदि समय पर जवाब नहीं मिला तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी। पायलटों और मैनेजमेंट के बीच इस टकराव ने न केवल एयरलाइन की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए हैं, बल्कि यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा को लेकर बड़ी बहस खड़ी कर दी है। पायलटों का स्पष्ट कहना है कि उन्हें एक अधिक पारदर्शी और सुरक्षित सिस्टम चाहिए, और जब तक यह स्थापित नहीं होता, ऐसी स्थितियां दोबारा भी पैदा हो सकती हैं। संकट के सात दिनों ने हजारों यात्रियों को प्रभावित किया है और अब पूरा देश यह जानना चाहता है कि असल जिम्मेदार कौन है—नियम, संसाधन या फिर मैनेजमेंट की मंशा?
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