संसद में बढ़ती तनातनी के बीच लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाएगा विपक्ष, कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप
संसद के बजट सत्र के दौरान लगातार बढ़ते हंगामे और तीखी राजनीतिक बयानबाजी के बीच विपक्ष ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने का ऐलान किया है। विपक्षी दलों का आरोप है कि सदन की कार्यवाही के दौरान स्पीकर का रवैया पक्षपातपूर्ण रहा है और लोकतांत्रिक परंपराओं का उल्लंघन किया गया है। खासतौर पर राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव और चीन सीमा विवाद जैसे अहम राष्ट्रीय मुद्दों पर विपक्ष के नेता राहुल गांधी को बोलने की अनुमति न दिए जाने को लेकर नाराजगी खुलकर सामने आई है।
विपक्ष का कहना है कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष को बार-बार बोलने से रोका गया, जबकि सत्तापक्ष के सांसदों को सदन में खुलकर अपनी बात रखने का अवसर दिया गया। सूत्रों के मुताबिक, विपक्ष यह अविश्वास प्रस्ताव बजट सत्र के दूसरे चरण में पेश करेगा, क्योंकि संसदीय प्रक्रिया के तहत इसके लिए कम से कम 20 दिनों का नोटिस देना अनिवार्य होता है। विपक्षी दलों का दावा है कि यह कदम किसी राजनीतिक रणनीति से नहीं, बल्कि संसद की गरिमा और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए उठाया जा रहा है।
इस अविश्वास प्रस्ताव के पीछे कई वजहें गिनाई जा रही हैं। इनमें लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष को बोलने की अनुमति न देना, महिला सांसदों के नाम लिए जाने को लेकर आपत्ति, ट्रेजरी बेंच के कुछ सांसदों को कथित तौर पर विशेषाधिकार देना और आठ विपक्षी सांसदों को पूरे बजट सत्र के लिए निलंबित किया जाना प्रमुख हैं। विपक्ष का आरोप है कि इन फैसलों से यह संदेश जा रहा है कि सदन में विपक्ष की आवाज को दबाने की कोशिश की जा रही है।
इंडिया गठबंधन के नेताओं ने संसद भवन परिसर में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के कार्यालय में बैठक कर अविश्वास प्रस्ताव लाने का फैसला किया। इस बैठक में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी सहित कई वरिष्ठ विपक्षी नेता मौजूद रहे। कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने कहा कि संसदीय परंपरा के अनुसार नेता प्रतिपक्ष को ‘शैडो प्रधानमंत्री’ माना जाता है, लेकिन मौजूदा हालात में उन्हें बोलने तक नहीं दिया जा रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार सदन में खुलकर हमला कर सकती है, लेकिन विपक्ष के लिए कोई जगह नहीं छोड़ी जा रही।
कांग्रेस सांसद मल्लू रवि ने भी स्पीकर पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिस तरह से सदन चलाया जा रहा है, उससे विपक्ष के पास अविश्वास प्रस्ताव लाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। उन्होंने कहा कि जब भी विपक्ष किसी मुद्दे को उठाने की कोशिश करता है, सदन की कार्यवाही रोक दी जाती है। विपक्ष का यह भी कहना है कि राहुल गांधी द्वारा चीन के साथ 2020 के सीमा विवाद पर चर्चा करने के दौरान पूर्व सेना प्रमुख की एक अप्रकाशित पुस्तक का हवाला देने पर उन्हें बोलने से रोका गया, जिससे विवाद और गहरा गया।
इस पूरे विवाद को आठ विपक्षी सांसदों के निलंबन ने और भड़का दिया है। इन सांसदों पर नियमों के उल्लंघन और सदन में हंगामा करने के आरोप लगाए गए थे। विपक्ष का कहना है कि यह कार्रवाई असंतुलित और एकतरफा है। कांग्रेस ने निलंबन को रद्द करने की मांग करते हुए स्पीकर पर भरोसा न होने की बात कही है। ऐसे में आने वाले दिनों में संसद का माहौल और गर्म होने के संकेत मिल रहे हैं।
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