April 17, 2026

उत्तर प्रदेश में आईएएस अधिकारी अभिषेक प्रकाश पर कार्रवाई: क्या सस्पेंशन के बाद ‘वृहद दंड’ होगा लागू?

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने करप्शन के आरोप में सीनियर आईएएस अधिकारी अभिषेक प्रकाश को निलंबित कर दिया है। इसके साथ ही एक व्यक्ति को भी गिरफ्तार किया गया है, जो उद्योगपति से कमीशन की मांग कर रहा था। यह कार्रवाई मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आदेश पर की गई, और अब इस मामले में आईएएस अधिकारी अभिषेक प्रकाश के खिलाफ अनुशासनिक कार्यवाही की शुरुआत हो चुकी है। आइए जानते हैं कि इस कार्यवाही के बाद आईएएस अधिकारी पर कौन से ‘वृहद दंड’ लागू हो सकते हैं।

किस प्रकार के दंड मिल सकते हैं?
टीवी9 डिजिटल से बातचीत करते हुए, पूर्व मुख्य सचिव आलोक रंजन ने बताया कि जब किसी अधिकारी को निलंबित किया जाता है, तो उसके खिलाफ अनुशासनिक कार्यवाही की जाती है, और इसमें ‘लघु दंड’ और ‘वृहद दंड’ का प्रावधान होता है। उन्होंने कहा, “अभिषेक प्रकाश के मामले में ‘वृहद दंड’ का जिक्र किया गया है। इस दंड के अंतर्गत तीन मुख्य विकल्प हो सकते हैं: पहला, उनका रैंक डिमोशन कर दिया जा सकता है, जिससे वर्तमान सचिव पद से उन्हें विशेष सचिव के पद पर भेजा जा सकता है। दूसरा, उनकी तनख्वाह में वृद्धि को रोक दिया जा सकता है। तीसरा और सबसे गंभीर दंड, बर्खास्तगी हो सकती है। अगर उनकी जांच में कोई पुख्ता सबूत सामने आते हैं, तो उन्हें बर्खास्त किया जा सकता है, और अगर वे किसी क्रिमिनल एक्ट में शामिल पाए जाते हैं तो एफआईआर भी दर्ज हो सकती है।”

क्या उन्हें नगालैंड कैडर में वापस भेजा जाएगा?
अलावा इसके, एक सवाल यह भी उठता है कि क्या आईएएस अधिकारी अभिषेक प्रकाश को वापस उनके पुराने नगालैंड कैडर में भेजा जा सकता है। इस बारे में आलोक रंजन ने बताया कि अभिषेक प्रकाश ने अपनी पत्नी अदिति सिंह के साथ शादी के बाद यूपी कैडर में आने का निर्णय लिया था, और अब इस मामले में कैडर बदलने की संभावना नहीं है, क्योंकि वह पहले ही यूपी कैडर में शामिल हो चुके थे।

क्या है मामला और क्यों हुए सस्पेंड?
अभिषेक प्रकाश के सस्पेंशन की वजह एक गंभीर करप्शन मामला है। आईएएस अधिकारी के खिलाफ यह मामला तब सामने आया जब एक उद्योगपति ने शिकायत की कि अभिषेक प्रकाश ने उससे 5% कमीशन की मांग की थी। यह मामला तब तूल पकड़ने लगा जब उक्त उद्योगपति ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से शिकायत की, जिसके बाद मुख्यमंत्री ने तत्काल गोपनीय जांच आदेशित की। जांच के दौरान, यह पता चला कि अभिषेक प्रकाश के आदेश पर उनका सहयोगी निकांत जैन ने उद्योगपति से कमीशन की डिमांड की थी।

गिरफ्तारी और पुलिस की कार्रवाई
इसके बाद, पुलिस ने तुरंत ही निकांत जैन को गिरफ्तार कर लिया। उन्होंने उद्योगपति से 5% कमीशन की मांग की थी, जो पूरी नहीं हो सकी थी। इसके चलते जांच शुरू हुई और गोमती नगर थाने में एफआईआर दर्ज करवाई गई। निकांत जैन को गिरफ्तार कर लिया गया और जेल भेज दिया गया।

अभिषेक प्रकाश का करियर
अभिषेक प्रकाश की गिनती पहले मुख्यमंत्री योगी के करीबी अधिकारियों में होती थी। वह तीन साल तक लखनऊ के डीएम रहे, और एक साल तक एलडीए का चार्ज भी उनके पास था। लेकिन लखनऊ के डीएम रहते हुए, उन्होंने डिफेंस एक्सपो के लिए जमीन अधिग्रहण के मामले में करप्शन के आरोपों का सामना किया था, हालांकि इस मामले में अब तक कोई कार्यवाही नहीं की गई थी।

आगे की कार्रवाई
अब जब अभिषेक प्रकाश को निलंबित किया जा चुका है, तो जांच एजेंसियां उनकी भूमिका की पूरी जांच कर रही हैं। यदि वे दोषी पाए जाते हैं, तो उन्हें डिमोशन, तनख्वाह में कटौती या बर्खास्तगी का सामना करना पड़ सकता है। इस मामले की गहराई से जांच की जा रही है, और अगर कोई क्रिमिनल एक्ट भी सामने आता है, तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।

क्या यह मामला भ्रष्टाचार की परिभाषा बदलने का संकेत है?
उत्तर प्रदेश में यह मामला भ्रष्टाचार और शासन व्यवस्था पर सवाल खड़ा कर रहा है। इस प्रकार की कार्रवाइयों से यह स्पष्ट हो जाता है कि योगी सरकार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर रही है, चाहे वह कितने भी बड़े अधिकारी क्यों न हों। यह राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता और ईमानदारी बनाए रखने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।

Share this content:

About The Author

error: Content is protected !!