तूफान के बाद सीएम का बड़ा एक्शन: 24 घंटे में रिपोर्ट दो, नहीं तो होगी सख्त कार्रवाई!

उत्तर प्रदेश में हाल ही में आए खराब मौसम और ओलावृष्टि ने किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। बेमौसम बारिश, ओले और तेज़ तूफान के चलते राज्य के कई जिलों में फसलों को भारी नुकसान हुआ है। इस आपदा की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तत्काल एक्शन लिया है और संबंधित अधिकारियों को फौरन सर्वेक्षण शुरू करने का निर्देश दिया है।

मुख्यमंत्री ने गुरुवार को स्पष्ट आदेश देते हुए कहा कि जिलाधिकारी, उपजिलाधिकारी (एसडीएम) और तहसीलदार स्वयं प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करें और 24 घंटे के भीतर फसलों को हुए नुकसान की विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर संबंधित विभाग को सौंपें। सीएम ने चेतावनी दी है कि यदि मुआवजा प्रक्रिया में किसी भी तरह की लापरवाही पाई गई, तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

यह निर्देश 9 अप्रैल की रात अचानक बदले मौसम के बाद जारी किया गया। उस रात तूफान, ओलावृष्टि और बिजली गिरने की घटनाओं ने राज्य के कई हिस्सों को प्रभावित किया, जिससे खासकर गेहूं की तैयार फसलों को गंभीर नुकसान पहुंचा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, कई इलाकों में किसान की मेहनत एक रात में तबाह हो गई।

सीएम के निर्देश के बाद राहत आयुक्त भानु चंद्र गोस्वामी ने सभी जिलों को अलर्ट किया और यह सुनिश्चित करने को कहा कि सर्वेक्षण रिपोर्ट विभाग के पोर्टल पर तुरंत अपलोड की जाए। जिन किसानों की फसलें 33 प्रतिशत या उससे अधिक क्षतिग्रस्त हुई हैं, उन्हें मुआवजा देने की प्रक्रिया प्राथमिकता के आधार पर की जाएगी।

इसके साथ ही राहत विभाग ने भी राज्य में खराब मौसम को देखते हुए अलर्ट जारी कर दिया है। नागरिकों को गैर-ज़रूरी रूप से घर से बाहर न निकलने की सलाह दी गई है। हालांकि, सुबह की बारिश ने कुछ जगहों पर गर्मी से राहत जरूर दी, लेकिन कई जिलों में यह राहत किसानों के लिए भारी पड़ी। इस साल अच्छी गेहूं पैदावार की उम्मीद लगाए बैठे किसानों को मौसम की मार ने एक बार फिर निराश किया है।

मुआवजा वितरण में बीमा कंपनियों की भी मदद ली जाएगी। राजस्व विभाग इन कंपनियों के साथ मिलकर नुकसान का मूल्यांकन करेगा और त्वरित मुआवजा सुनिश्चित करेगा। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि किसानों को किसी प्रकार की परेशानी न हो, यह अधिकारियों की जिम्मेदारी है।

प्रदेश सरकार के इस तेज़ और सख्त रुख से यह साफ है कि अब लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं बचेगी। अगले 24 घंटे राज्य प्रशासन के लिए परीक्षा की घड़ी हैं—या तो रिपोर्ट देंगे, या कार्रवाई झेलेंगे।

 

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