अयोध्या: योगी सरकार 52 एकड़ में बनाएगी विश्व स्तरीय राम मंदिर संग्रहालय, कैबिनेट से मंजूरी
उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने अयोध्या में एक भव्य और विश्व स्तरीय राम मंदिर संग्रहालय बनाने का बड़ा निर्णय लिया है। मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में इस परियोजना को आधिकारिक मंजूरी दे दी गई। यह विशाल संग्रहालय 52 एकड़ जमीन पर बनाया जाएगा और इसके निर्माण की जिम्मेदारी टाटा संस संभालेगी। सरकार का कहना है कि यह संग्रहालय अयोध्या की धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान को वैश्विक स्तर पर स्थापित करेगा।
संग्रहालय अयोध्या के माझा जमथरा क्षेत्र में विकसित किया जाएगा। सरकार के मुताबिक, यह प्रोजेक्ट केवल आकार में ही नहीं, बल्कि गुणवत्ता और निर्माण के स्तर पर भी अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन करेगा। इस संग्रहालय में सनातन परंपरा, वेद-पुराण, भारतीय मंदिर वास्तुकला और प्राचीन साहित्य की महत्ता को आधुनिक प्रस्तुति के साथ दिखाया जाएगा। सरकार का उद्देश्य है कि यह जगह आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सांस्कृतिक धरोहर का केंद्र बने।
राज्य सरकार पहले से ही अयोध्या में कई बड़े निर्माण कार्य करवा रही है, जिनमें पर्यटन सुविधाओं का विस्तार और धार्मिक महत्व वाली जगहों का विकास प्रमुख है। नया संग्रहालय इस विकास में एक और बड़ी कड़ी होगा। अधिकारियों का मानना है कि इससे न सिर्फ अयोध्या की छवि और आकर्षण बढ़ेगा, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी तैयार होंगे। इससे राज्य की अर्थव्यवस्था और पर्यटन उद्योग दोनों को मजबूती मिलेगी।
संग्रहालय की विशेषताओं में वेदों, पुराणों और प्राचीन ग्रंथों पर आधारित शोधित सामग्री, सनातन धर्म के इतिहास को दर्शाने वाली आधुनिक तकनीक, भव्य प्रदर्शनी हॉल और भारतीय मंदिर वास्तुकला का अनूठा प्रदर्शन शामिल होगा। आगंतुक यहां भारतीय संस्कृति और धार्मिक इतिहास की गहराई को समझ सकेंगे। सरकार का उद्देश्य है कि यह संग्रहालय पूरी दुनिया के पर्यटकों और शोधकर्ताओं के लिए प्रमुख आकर्षण केंद्र बने।
कुछ दिन पहले ही अयोध्या में राम मंदिर परिसर में धर्म ध्वजा फहराया गया था, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फहराया था। यह ध्वज 10 फुट ऊंचा और 20 फुट लंबा समकोण त्रिकोणाकार है, जिस पर सूर्य, ‘ॐ’ और कोविदार वृक्ष का प्रतीक अंकित है। मंदिर के निर्माण कार्य के पूरा होने और ध्वजारोहण के बाद अब सरकार द्वारा संग्रहालय का निर्माण अयोध्या को एक विस्तृत सांस्कृतिक राजधानी के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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