यूपी में मुसलमानों के अधिकार छीने जा रहे – लोकदल अध्यक्ष का बड़ा आरोप
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर हलचल मच गई है। लोकदल के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी सुनील सिंह ने प्रदेश की भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि प्रदेश में न तो हिंदू सुरक्षित हैं और न ही मुसलमान। गुरुवार को राजधानी लखनऊ में मीडिया से बातचीत करते हुए सुनील सिंह ने सरकार की अल्पसंख्यक नीति पर सवाल उठाए और कहा कि यूपी में मुसलमानों को उनके अधिकारों से वंचित किया जा रहा है।
“मुसलमान अपने त्योहार भी नहीं मना पा रहे हैं” – लोकदल अध्यक्ष
चौधरी सुनील सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश में मुसलमानों के साथ भेदभाव किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में मुसलमान अपने धार्मिक पर्व भी स्वतंत्र रूप से नहीं मना पा रहे हैं। उन्होंने कहा, “जब से भाजपा सरकार सत्ता में आई है, तब से प्रदेश में सांप्रदायिक माहौल बिगड़ा है। मुसलमानों को टारगेट कर उनके लोकतांत्रिक अधिकारों का उल्लंघन किया जा रहा है।”
लोकदल अध्यक्ष ने दावा किया कि अल्पसंख्यकों के खिलाफ एकतरफा कार्रवाई हो रही है। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक राजनीतिक आरोप नहीं है, बल्कि हकीकत है जिसे देश और दुनिया की कई संस्थाएं भी प्रमाणित कर रही हैं। उन्होंने कहा, “ह्यूमन राइट्स कमीशन से लेकर अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां तक यह कह रही हैं कि 2017 के बाद से यूपी में मुसलमानों के अधिकारों का उल्लंघन बढ़ गया है।”
“सरकार का मुख्य एजेंडा सिर्फ हिंदू-मुसलमान की राजनीति”
भाजपा सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए सुनील सिंह ने कहा कि प्रदेश की सरकार सिर्फ सांप्रदायिक राजनीति में व्यस्त है। उन्होंने पूछा, “पिछले आठ वर्षों में किसानों की समस्याओं का क्या हल निकाला गया? गन्ना किसानों के बकाए का क्या हुआ? महंगाई पर सरकार चुप क्यों है? बेरोजगारी का समाधान क्या निकला? इन सब सवालों के जवाब देने के बजाय सरकार सिर्फ हिंदू-मुसलमान की राजनीति कर रही है।”
लोकदल अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार की प्राथमिकता जनता की समस्याएं नहीं हैं। उन्होंने कहा कि रामपुर, संभल समेत यूपी के कई हिस्सों में सांप्रदायिक तनाव और दंगे हुए हैं, लेकिन सरकार ने इन्हें रोकने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
“मुसलमानों के लोकतांत्रिक अधिकारों का उल्लंघन हो रहा”
सुनील सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश में मुसलमानों के साथ हो रहे अन्याय को अब अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं भी देख रही हैं। उन्होंने कहा, “देश की अदालतों से लेकर अंतरराष्ट्रीय मंच तक, हर जगह से यह बात सामने आई है कि यूपी में 2017 के बाद से मुसलमानों के डेमोक्रेटिक राइट्स का उल्लंघन हो रहा है।”
उन्होंने सरकार पर अल्पसंख्यकों के खिलाफ एकतरफा कार्रवाई करने का आरोप लगाते हुए कहा कि यह लोकतंत्र के लिए खतरनाक संकेत हैं।
“जनता जान चुकी है सच्चाई, बदलाव होगा”
लोकदल अध्यक्ष ने दावा किया कि अब जनता सच्चाई समझ चुकी है। उन्होंने कहा कि यूपी की जनता को धर्म के नाम पर बांटकर असली मुद्दों से भटकाया जा रहा है, लेकिन अब लोग समझदार हो गए हैं और आने वाले समय में इसका जवाब देंगे।
उन्होंने भाजपा सरकार को चेतावनी देते हुए कहा, “जनता अब बदलाव चाहती है और बहुत जल्द इस सांप्रदायिक राजनीति का अंत होगा।”
क्या 2024 के चुनाव में असर डालेगा यह मुद्दा?
लोकदल के राष्ट्रीय अध्यक्ष के इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ गई है। क्या यह मुद्दा आगामी चुनावों में भाजपा के लिए चुनौती बन सकता है? क्या अल्पसंख्यकों की नाराजगी भाजपा की सत्ता के लिए खतरा पैदा करेगी? यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले दिनों में प्रदेश की राजनीति किस दिशा में जाती है।
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