व्हाइट हाउस में लश्कर से जुड़े जेहादी की एंट्री? ट्रंप प्रशासन की नई नियुक्तियों से उठे बड़े सवाल
वॉशिंगटन से आई एक चौंकाने वाली खबर ने दुनिया भर की सुरक्षा एजेंसियों और राजनीतिक हलकों में सनसनी फैला दी है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में गठित Lay Leaders Advisory Board में ऐसे दो मुस्लिम व्यक्तियों को नियुक्त किया गया है, जिनकी पृष्ठभूमि को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। इनमें से एक का सीधा संबंध खूंखार आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) से बताया जा रहा है, जो भारत के कश्मीर सहित कई हिस्सों में बड़े पैमाने पर आतंकी हमलों का जिम्मेदार रहा है।
यह नियुक्ति ऐसे समय में की गई है जब अमेरिका खुद लंबे समय से आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक लड़ाई में सबसे आगे खड़ा होने का दावा करता रहा है। लेकिन अब व्हाइट हाउस की आधिकारिक वेबसाइट पर इन दोनों संदिग्ध व्यक्तियों के नाम Advisory Board में देखकर यह सवाल उठना लाज़मी है कि क्या अमेरिका की आंतरिक सुरक्षा नीति में कोई बड़ी चूक हुई है, या फिर यह कोई सोची-समझी रणनीति है?
डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में यह समिति बनाई है, जिसका उद्देश्य धार्मिक स्वतंत्रता और विश्वास आधारित नीतियों पर सलाह देना बताया गया है। लेकिन इसमें शामिल किए गए दो तथाकथित इस्लामी विद्वानों में से एक की पृष्ठभूमि बेहद संदिग्ध है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उसका सीधा जुड़ाव लश्कर-ए-तैयबा जैसे आतंकी संगठन से रहा है, जिसे संयुक्त राष्ट्र समेत कई देशों ने आतंकी संगठन घोषित किया है। वहीं दूसरे व्यक्ति की नियुक्ति को लेकर भी विवाद खड़ा हो गया है, क्योंकि उस पर भी जेहादी विचारधारा को बढ़ावा देने के आरोप लगे हैं।
इन दोनों नामों को लेकर अमेरिकी प्रशासन की ओर से अब तक कोई स्पष्ट सफाई नहीं आई है, जबकि सोशल मीडिया और अंतरराष्ट्रीय मीडिया में इसकी तीखी आलोचना हो रही है। कई विश्लेषकों का कहना है कि ऐसी नियुक्तियों से न सिर्फ अमेरिका की आतंकवाद विरोधी छवि को नुकसान पहुंचेगा, बल्कि यह आतंकवादियों को वैध मंच देने जैसा गंभीर कदम भी साबित हो सकता है।
भारत में भी इस खबर को लेकर चिंता जताई जा रही है, खासकर इसलिए क्योंकि लश्कर-ए-तैयबा का नाम सुनते ही 26/11 जैसे भयावह आतंकी हमलों की याद ताजा हो जाती है। ऐसे में यदि किसी ऐसे व्यक्ति को व्हाइट हाउस की एडवाइजरी बोर्ड में जगह दी गई है, जिसका अतीत सीधे लश्कर से जुड़ा हो, तो यह भारत-अमेरिका संबंधों पर भी असर डाल सकता है।
अब सबकी निगाहें इस पर टिकी हैं कि अमेरिकी प्रशासन इस विवाद पर क्या प्रतिक्रिया देता है और क्या इन नियुक्तियों की गहन जांच होगी या नहीं। फिलहाल, यह मामला दुनियाभर में चर्चाओं का विषय बना हुआ है।
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