तीन दिन में 5.26 करोड़ का गबन, गड्ढों में छिपाया खजाना – जब एटीएम के कैश से शुरू हुई ‘मौज’ की कहानी
उत्तर प्रदेश के बागपत और शामली जिले से एक हैरान कर देने वाली घटना सामने आई है, जहां दो युवकों ने बैंक से एटीएम में डालने के लिए निकाली गई करोड़ों की रकम का गबन कर लिया। यह कोई फिल्मी पटकथा नहीं, बल्कि असल जिंदगी की एक ऐसी कहानी है जिसमें लालच, साजिश, गुप्त ठिकाने और मौज-मस्ती का अजीबोगरीब मेल है। पुलिस ने इस मामले में दो मुख्य आरोपियों – गौरव और रॉकी – को गिरफ्तार किया है और उनसे गबन किए गए 5.26 करोड़ रुपये भी बरामद कर लिए हैं, जिन्हें आरोपियों ने गड्ढों में दबाकर रखा था।
पूरे मामले की शुरुआत हुई मेरठ की एक एटीएम कैश मैनेजमेंट कंपनी से, जहां रॉकी पहले से कार्यरत था और गौरव को हाल ही में स्थायी नियुक्ति मिली थी। दोनों को 22 एटीएम में कैश डालने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। लेकिन जब उन्होंने बैंक से कैश लेना शुरू किया और उसकी मात्रा देखी, तो उनके मन में लालच घर कर गया। इसके बाद जो हुआ, वो किसी क्राइम थ्रिलर से कम नहीं।
तीन दिनों तक दोनों ने रोजाना कैश में हेराफेरी करते हुए 5.26 करोड़ रुपये तक की रकम जमा कर ली। रकम बंटवारे का तरीका भी तय था – आधा-आधा। इसके बाद गौरव और रॉकी ने अपने-अपने घरों और खेतों में गड्ढे खोदे और इस भारी-भरकम रकम को छिपा दिया। उन्होंने इतनी होशियारी से यह रकम जमीन के अंदर दबाई कि किसी को भनक तक नहीं लगी। जब भी उन्हें खर्च के लिए पैसे चाहिए होते, वे गड्ढे से कुछ कैश निकालते और फिर निकल पड़ते मौज करने के लिए।
पूछताछ में दोनों आरोपियों ने बताया कि इस रकम का इस्तेमाल उन्होंने दिल्ली, हरिद्वार और चंडीगढ़ जैसी जगहों पर घूमने-फिरने, ऐशो-आराम और शौक पूरे करने में किया। रॉकी, जो शामली जिले के हसनपुर का निवासी है, पहले से ही कंपनी में कार्यरत था, जबकि गौरव, बागपत के आरिफपुर खड़खड़ी का निवासी, हाल ही में 11 फरवरी को स्थायी हुआ था। शायद स्थायीत्व की खुशी ही उन्हें इस ‘नए सफर’ पर ले गई – लेकिन यह सफर ज्यादा लंबा नहीं चला।
गौरव और रॉकी की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने उनके बताए ठिकानों से गड्ढों में दबाए गए करोड़ों रुपये बरामद कर लिए हैं। रकम की बरामदगी के बाद अब पुलिस इस पूरे मामले में अन्य संभावित सहयोगियों और कंपनी के भीतर की लापरवाहियों की भी जांच कर रही है।
इस पूरी घटना ने न केवल सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि इस बात को भी उजागर कर दिया है कि जब सिस्टम में भरोसेमंद जिम्मेदारियों को निभाने वाले ही गबन के खेल में उतर जाएं, तो कैसे एक बड़ी साजिश को अंजाम दिया जा सकता है।
फिलहाल, दोनों आरोपी सलाखों के पीछे हैं, लेकिन पुलिस की जांच अब यह जानने में जुटी है कि क्या उनके अलावा भी कोई और इस गबन कांड में शामिल था – या यह दो लोगों का अकेला और ‘हौसला भरा’ खेल था? जवाब तलाशे जा रहे हैं, लेकिन इस कहानी ने एक बार फिर साबित कर दिया कि जब लालच बढ़ जाए, तो गड्डों में भी करोड़ों दफन हो सकते हैं।
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