चुनावी रंजिश में छलनी हुआ पूर्व प्रधान का बेटा – गोली, साजिश और मौत की पूरी कहानी
उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले से एक बार फिर पंचायत चुनाव की दुश्मनी ने खून बहा दिया है। सत्तासीन राजनीति की नींव में नफरत और रंजिश की ऐसी इबारत लिखी गई, जिसका अंत एक नौजवान की लाश पर हुआ। मामला सामने आया है ग्राम पंचायत सिपहिया प्यूली का, जहां पूर्व ग्राम प्रधान के बेटे राजन अवस्थी की गोली मारकर हत्या कर दी गई। यह गोलीकांड केवल एक आपसी विवाद नहीं, बल्कि एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा बताया जा रहा है, जिसके पीछे चुनावी टकराव की चिंगारी जल रही थी।
पुलिस के मुताबिक, 26 वर्षीय राजन अवस्थी और वर्तमान ग्राम प्रधान सीमा अवस्थी के पति सचिव अवस्थी के बीच लंबे समय से पंचायत चुनाव को लेकर रंजिश चली आ रही थी। इस टकराव ने शुक्रवार को हिंसक रूप ले लिया, जब एक विवाद के दौरान राजन को गोलियों से निशाना बनाया गया। गोली लगने के बाद राजन को तुरंत लखनऊ के मेडिकल कॉलेज स्थित ट्रामा सेंटर ले जाया गया, जहां उसकी गंभीर हालत को देखते हुए ऑपरेशन कर शरीर से गोली निकाली गई। लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद शनिवार शाम इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
राजन की मौत से गांव और क्षेत्र में सनसनी फैल गई। परिजनों ने इस हत्याकांड के लिए सीधा आरोप सीमा अवस्थी के पति सचिव अवस्थी, उनके भतीजे मृत्युंजय अवस्थी और शिवम अवस्थी पर लगाया। हरदी थाना क्षेत्र की पुलिस ने मृतक के भाई की तहरीर पर नामजद मुकदमा दर्ज किया और जांच शुरू कर दी।
पुलिस की तफ्तीश में पता चला कि गोलीकांड के बाद तीनों आरोपी फरार हो गए थे। लेकिन घटनास्थल से कुछ घंटों बाद शुक्रवार देर शाम को ही आरोपी मृत्युंजय अवस्थी को श्रावस्ती जिले के इकौना थाना क्षेत्र के सीतादोहार इलाके से गिरफ्तार कर लिया गया, जब वह मोटरसाइकिल से भागने की कोशिश कर रहा था। बाकी दो आरोपी अब भी फरार हैं, जिनकी तलाश में पुलिस लगातार दबिश दे रही है।
हरदी थाना प्रभारी संजय सिंह ने जानकारी दी है कि मामले में अब हत्या की धारा भी जोड़ दी जाएगी। प्रशासन इस मामले को पूरी गंभीरता से ले रहा है, क्योंकि यह केवल एक आपराधिक वारदात नहीं, बल्कि पंचायत स्तर पर पनप रही राजनीतिक हिंसा की बड़ी चेतावनी है।
इस घटना का असर राजनीतिक आयोजनों पर भी पड़ा। भाजपा विधायक सुरेश्वर सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार के आठ साल पूरे होने के उपलक्ष्य में महसी विधानसभा क्षेत्र में आयोजित होने वाली मोटरसाइकिल रैली को सिपहिया प्यूली में हुई इस हिंसक वारदात के चलते स्थगित कर दिया गया।
अब सवाल ये उठता है कि क्या पंचायत चुनाव की सत्ता की भूख इतनी गहरी हो गई है कि इंसानी जानों की कोई कीमत नहीं रही? क्या ग्रामीण राजनीति अब केवल वर्चस्व की लड़ाई बनकर रह गई है, जहां मतभेद सीधे गोलियों में तब्दील हो जाते हैं?
फिलहाल, बहराइच का यह गांव शोक और दहशत के माहौल में है, और पूरा इलाका इस दर्दनाक हत्या की गूंज से सहमा हुआ है। पुलिस की कार्रवाई और प्रशासन की सख्ती ही अब मृतक के परिवार को न्याय दिला सकती है – लेकिन सवाल तो ये भी है कि अगला शिकार कौन?
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