April 22, 2026

USAID फंडिंग विवाद: भारत में वोटिंग प्रतिशत बढ़ाने के लिए 21 मिलियन डॉलर की फंडिंग पर उठे सवाल, विदेश मंत्री जयशंकर ने जताई चिंता

भारत और अमेरिका के बीच USAID (यूनाइटेड स्टेट्स एजेंसी फॉर इंटरनेशनल डेवलपमेंट) द्वारा फंडिंग को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है, जो अब राजनीतिक और कूटनीतिक विमर्श का हिस्सा बन चुका है। इस विवाद के बीच, भारत के वित्त मंत्रालय ने हाल ही में एक रिपोर्ट जारी की है, जिसमें USAID द्वारा दी गई फंडिंग के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई है।

रिपोर्ट के अनुसार, USAID ने वित्तीय वर्ष 2023-24 के दौरान भारत में कुल 7 प्रोजेक्ट्स के लिए 750 मिलियन डॉलर (लगभग 65 अरब रुपये) की फंडिंग प्रदान की है। इन परियोजनाओं में मुख्य रूप से कृषि और खाद्य सुरक्षा, जल, स्वच्छता और साफ-सफाई, नवीकरणीय ऊर्जा, डिजास्टर मैनेजमेंट और स्वास्थ्य से संबंधित कार्यक्रमों को प्राथमिकता दी गई है। इसके अलावा, रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि यूएसएड ने वन एवं जलवायु अनुकूल कार्यक्रम और ऊर्जा दक्षता प्रौद्योगिकी व्यवसायीकरण तथा नवाचार परियोजना के लिए भी फंडिंग देने का वादा किया है।

वित्त मंत्रालय की रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि, इस फंडिंग के तहत वोटिंग प्रतिशत बढ़ाने के लिए कोई धनराशि नहीं दी गई, जबकि इससे पहले अमेरिकी सरकारी दक्षता विभाग (DOGE) के द्वारा एक खुलासा हुआ था, जिसमें कहा गया था कि USAID ने भारत में वोटिंग प्रतिशत को बढ़ावा देने के लिए 21 मिलियन डॉलर की सहायता दी थी। इस खुलासे ने भारत में राजनीतिक हलकों में हंगामा मचा दिया और कई तरह के सवाल उठने लगे।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस खुलासे के बाद बयान दिया, जिसमें उन्होंने कहा कि “हम भारत में वोटिंग प्रतिशत बढ़ाने के लिए 21 मिलियन डॉलर की मदद दे रहे हैं, लेकिन हमें भी अपने देश में इस पर ध्यान देना होगा।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि “भारत के पास पर्याप्त धन है, ऐसे में हमें उसे चुनावों में मदद देने के लिए 21 मिलियन डॉलर क्यों देना चाहिए?”

इस पर भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भी चिंता जताई। उन्होंने कहा, “यूएसएआईडी की ओर से दी गई जानकारी चिंताजनक है और हमारी सरकार इस पर जांच कर रही है। अगर इस तरह की गतिविधियां हुई हैं, तो देश को यह जानना चाहिए कि कौन लोग इसमें शामिल थे और उनका उद्देश्य क्या था।”

साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि, “अगर इस प्रकार की विदेशी फंडिंग से भारत के चुनावी प्रक्रिया पर प्रभाव पड़ने की कोशिश की जा रही है, तो यह निश्चित रूप से एक गंभीर मामला होगा।”

यह विवाद अब केवल भारत और अमेरिका के बीच कूटनीतिक संबंधों तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि यह पूरे विश्व में राजनीतिक और कूटनीतिक विमर्श का हिस्सा बन गया है। भारत में इसे लेकर विभिन्न दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है, वहीं इस मामले में ट्रंप के बयान ने और अधिक जटिलता पैदा कर दी है।

इस मुद्दे पर जल्द ही और अधिक प्रतिक्रियाएं सामने आ सकती हैं, और भारत सरकार की ओर से इस मामले की जांच को लेकर अगले कदम उठाए जाने की संभावना है।

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