1129 करोड़ के घोटाले में सपा नेता गिरफ्तार! ईडी के शिकंजे में गोरखपुर का रसूखदार, मुंबई-लखनऊ तक मचा हड़कंप”

उत्तर प्रदेश की सियासत में उस वक्त भूचाल आ गया, जब सोमवार को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने समाजवादी पार्टी के नेता विनय शंकर तिवारी को मनी लॉन्ड्रिंग और बैंक धोखाधड़ी के आरोपों में गिरफ्तार कर लिया। दिवंगत बाहुबली और पूर्व बसपा विधायक हरिशंकर तिवारी के बेटे विनय शंकर तिवारी पर आरोप है कि उन्होंने गंगोत्री इंटरप्राइजेज प्राइवेट लिमिटेड के नाम पर बैंकों से 1129 करोड़ रुपये का कर्ज लेकर गबन किया और पैसे को दूसरी जगह निवेश कर डकार गए।

ईडी की सर्जिकल कार्रवाई – लखनऊ, गोरखपुर और मुंबई में छापेमारी

सोमवार सुबह से ही ईडी की टीमें लखनऊ, गोरखपुर और मुंबई में सक्रिय हो गई थीं। एक के बाद एक कई ठिकानों पर छापेमारी की गई। गंगोत्री इंटरप्राइजेज और उससे जुड़ी अन्य कंपनियों के ऑफिसों में हुई कार्रवाई में दस्तावेजों, इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और वित्तीय रिकॉर्ड को जब्त किया गया। इसी दौरान कंपनी के जनरल मैनेजर अजीत पांडेय को भी गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया।

लोन की आड़ में 754 करोड़ की चपत! कैसे हुआ इतना बड़ा घोटाला?

ईडी की जांच में जो खुलासा हुआ, उसने सभी को हैरान कर दिया। गंगोत्री इंटरप्राइजेज लिमिटेड और उसके प्रमोटर्स ने बैंक ऑफ इंडिया और सात अन्य बैंकों के कन्सोर्टियम से कुल 1129.44 करोड़ रुपये का लोन लिया, लेकिन इसका भुगतान नहीं किया। बल्कि, कागजों की बाजीगरी से इस लोन को दूसरी जगह ट्रांसफर कर लिया गया। जांच में यह भी पाया गया कि कंपनी ने नियमों को ताक पर रखते हुए बैंकों को कुल 754.24 करोड़ रुपये की चपत लगाई।

CBI और ED दोनों एजेंसियां एक्शन में

बैंक ऑफ इंडिया के क्लस्टर लीड बैंक ने इस मामले की शिकायत की थी, जिसके बाद CBI ने बैंक धोखाधड़ी का केस दर्ज कर जांच शुरू की। अब इस मामले में ईडी ने भी PMLA (प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट) के तहत केस दर्ज कर लिया है। सोमवार की कार्रवाई उसी सिलसिले का हिस्सा थी।

कौन हैं विनय शंकर तिवारी?

विनय शंकर तिवारी पूर्व बाहुबली नेता हरिशंकर तिवारी के बेटे हैं। वह पहले बहुजन समाज पार्टी से विधायक रह चुके हैं और बाद में समाजवादी पार्टी में शामिल हुए थे। गोरखपुर और पूर्वांचल की राजनीति में उनका अच्छा-खासा प्रभाव रहा है। लेकिन अब वे कानूनी शिकंजे में आ चुके हैं, और गिरफ्तारी के बाद सियासी समीकरणों पर भी असर पड़ना तय माना जा रहा है।

अब आगे क्या?

ईडी को इस घोटाले से जुड़े कई ठोस सबूत हाथ लगे हैं, और सूत्रों का कहना है कि आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या इस घोटाले में कुछ और राजनीतिक चेहरे भी शामिल हैं? क्या गंगोत्री ग्रुप की आड़ में और भी कंपनियों को लोन घोटाले के लिए इस्तेमाल किया गया?

बैंक धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग के इस ताजा घटनाक्रम ने न सिर्फ गोरखपुर की राजनीति को झकझोर दिया है, बल्कि सपा के लिए भी यह एक बड़ा झटका माना जा रहा है। 1129 करोड़ के इस महाघोटाले की परतें अभी खुलना बाकी हैं, और अगली कार्रवाई किसे लपेटे में लेगी, इस पर पूरे प्रदेश की निगाहें टिक गई हैं।

एक बात तो तय है – सत्ता, कारोबार और कर्ज के इस खेल में अब ईडी की एंट्री ने सियासत की स्क्रिप्ट को पूरी तरह बदल दिया है।

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