यूपी में मुठभेड़ों की बौछार: नोएडा से मथुरा और सुल्तानपुर से कौशांबी तक अपराधियों पर चला पुलिस का कहर
उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों में बीती रात कुछ ऐसा हुआ, जिसने पूरे प्रदेश में कानून व्यवस्था की ताकत का एहसास करा दिया। कहीं टप्पेबाज से मुठभेड़, तो कहीं गौ तस्करों पर चली गोली… कोई सड़क पर गिरा घायल, तो कोई हथकड़ी में कैद हो गया। यूपी पुलिस का एनकाउंटर मोड अब पूरी तरह से एक्टिव हो चुका है—और इस बार टारगेट पर थे कुख्यात अपराधी।
सबसे पहले बात नोएडा की। ग्रेटर नोएडा के बिसरख थाना क्षेत्र में एक ऐसे बदमाश से मुठभेड़ हुई जो 10 लाख रुपये की ठगी में शामिल था। पुलिस को जैसे ही सूचना मिली, घेराबंदी की गई। लेकिन खुद को फंसता देख अपराधी ने फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में पुलिस की गोली उसके पैर में जा लगी और वह मौके पर ही गिर गया। जांच में सामने आया कि आरोपी के खिलाफ हरियाणा में भी कई आपराधिक मामले दर्ज हैं।
मथुरा में भी बड़ा एक्शन हुआ। दो दिन पहले दिल्ली-आगरा हाईवे पर हुई चांदी लूट की गुत्थी को सुलझाते हुए पुलिस ने दो लुटेरों को मुठभेड़ में पकड़ लिया। मुखबिर से सूचना मिली कि राहुल और नीरज नाम के आरोपी बुलेरो गाड़ी से फरार हो रहे हैं। पुलिस ने पीछा किया, और जब बदमाशों ने गोलीबारी शुरू की तो पुलिस ने भी जवाब दिया। मुठभेड़ में दोनों लुटेरे घायल हुए और अस्पताल में भर्ती हैं।
सुल्तानपुर में बीती रात गौ तस्करों और पुलिस के बीच भीषण मुठभेड़ हुई। कादीपुर थाना क्षेत्र में जब पुलिस और एसओजी की टीम ने बदमाशों को रोकने की कोशिश की तो उन्होंने सीधे पुलिस टीम पर फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी फायरिंग में मोहम्मद जावेद और साहिल नाम के दो बदमाश घायल हो गए, जबकि तीसरे आरोपी सुशील उपाध्याय को गिरफ्तार कर लिया गया। सभी को अस्पताल में भर्ती कराया गया है और इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई है।
कौशांबी में भी इसी तरह का दृश्य देखने को मिला, जहां पिपरी और लोधौर चौकी पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर चोर गैंग को पकड़ने की कोशिश की। बदमाशों ने फायरिंग की और पुलिस ने जवाब दिया। इस मुठभेड़ में एक बदमाश घायल हुआ जबकि दूसरा मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया गया।
उत्तर प्रदेश में इन ताबड़तोड़ मुठभेड़ों से साफ हो गया है कि योगी सरकार का ‘क्राइम फ्री यूपी’ का नारा अब केवल नारा नहीं, जमीनी हकीकत बनता जा रहा है। हर जिले में बदमाशों पर कार्रवाई तेज़ है और पुलिस का संदेश साफ है—अब अपराधियों के लिए यूपी में कोई जगह नहीं।
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