“सॉरी, मैं अब और नहीं जी सकती…” शारदा यूनिवर्सिटी की छात्रा के सुसाइड नोट ने झकझोरा देश, दो प्रोफेसरों पर गंभीर आरोप
उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा स्थित शारदा यूनिवर्सिटी की बीडीएस सेकंड ईयर की छात्रा ज्योति की आत्महत्या का मामला अब राष्ट्रीय स्तर पर गूंज उठा है। छात्रा द्वारा छोड़ा गया सुसाइड नोट न केवल उसकी पीड़ा को उजागर करता है, बल्कि दो प्रोफेसरों पर मानसिक उत्पीड़न के गंभीर आरोप भी लगाता है। छात्रा ने शुक्रवार को हॉस्टल के कमरे में फांसी लगाकर जान दे दी, जिससे विश्वविद्यालय परिसर में हड़कंप मच गया।
ज्योति ने अपने सुसाइड नोट में लिखा—”सॉरी, मैं अब और नहीं जी सकती। उन्होंने मुझे मानसिक रूप से प्रताड़ित किया, अपमानित किया… मैं डिप्रेशन में हूं। मेरी मौत के लिए डॉ. महेंद्र सिंह चौहान और डॉ. शैरी वशिष्ठ जिम्मेदार हैं। मैं चाहती हूं कि वे जेल जाएं और उन्हें भी वही सब झेलना पड़े जो मैंने झेला।” इस नोट ने पूरे मामले को और भी गंभीर बना दिया है।
घटना के वक्त ज्योति हॉस्टल में अकेली थी। जब उसकी रूममेट वापस लौटी तो कमरा अंदर से बंद मिला। दरवाजे को जब जोर से धक्का दिया गया, तो वह खुला और अंदर ज्योति फंदे से लटकी हुई मिली। सूचना मिलते ही वार्डन और अन्य छात्र मौके पर पहुंचे और पुलिस को जानकारी दी गई। छात्रा पर कथित तौर पर फर्जी हस्ताक्षर करने का आरोप लगाया गया था, जिससे वह मानसिक रूप से बुरी तरह टूट चुकी थी।
छात्रों ने बताया कि पिछले तीन दिन—गुरुवार, शुक्रवार और शनिवार—ज्योति को PCP (Pre Clinical Prosthodontics) डिपार्टमेंट से क्लास से भगा दिया गया था। फाइल HOD के पास भेज दी गई थी और उस पर अभद्रता से व्यवहार किया गया। उसे माता-पिता को बुलाने के लिए मजबूर किया गया और यह तक धमकी दी गई कि उसे फेल कर दिया जाएगा।
घटना के बाद छात्रों और परिजनों में गुस्सा फूट पड़ा। विश्वविद्यालय में छात्रों ने जमकर प्रदर्शन किया और न्याय की मांग को लेकर पुलिस से भिड़ गए। फिलहाल दोनों आरोपी प्रोफेसरों को सस्पेंड कर दिया गया है और पुलिस मामले की गहन जांच कर रही है। ज्योति की आत्महत्या ने संस्थागत उत्पीड़न और मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दे को एक बार फिर सामने ला दिया है।
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