उत्तर प्रदेश में फर्जी एससी-एसटी एक्ट मुकदमों पर कड़ी कार्रवाई, चार मामलों में आरोपियों को जेल और जुर्माने की सजा
उत्तर प्रदेश में एससी-एसटी एक्ट के दुरुपयोग के बढ़ते मामलों पर विशेष न्यायालय ने सख्त रुख अपनाया है। लखनऊ के विशेष न्यायाधीश विवेकानंद शरण त्रिपाठी ने हाल ही में चार मामलों में झूठे मुकदमे दर्ज कराने वालों को 5 से 10 साल तक की जेल और भारी जुर्माना सुनाकर एक बड़ा संदेश दिया है।
पहले मामले में सहदेव ने 16 दिसंबर 2023 को गाजीपुर थाने में दो लोगों के खिलाफ लूट समेत एससी-एसटी एक्ट के तहत शिकायत दर्ज कराई थी। जांच में मामला झूठा पाया गया और कोर्ट ने सहदेव को झूठा मुकदमा दर्ज कराने पर सात साल की सजा और दो लाख से अधिक का जुर्माना लगाया।
दूसरे मामले में रमेश रावत ने वर्ष 2022 में चार लोगों के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट समेत मारपीट का झूठा मुकदमा दर्ज कराया था, जो बाद में खारिज हो गया। कोर्ट ने रमेश को पांच साल की जेल और 50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
तीसरे मामले में लाखन सिंह ने जमीन के विवाद में झूठे आरोप लगाकर हत्या के प्रयास समेत कई धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया। जांच में केस झूठा पाया गया, जिसके बाद कोर्ट ने लाखन को 10 साल कैद और दो लाख 51 हजार रुपये का जुर्माना दिया।
चौथे मामले में बाराबंकी की रेखा देवी ने सामूहिक दुष्कर्म समेत जानमाल की धमकी का झूठा केस दर्ज कराया था। जांच में आरोप गलत पाए जाने पर कोर्ट ने उसे सात साल छह महीने की जेल और दो लाख रुपये से अधिक जुर्माने की सजा सुनाई।
इन फैसलों से यह स्पष्ट हो गया है कि एससी-एसटी एक्ट का दुरुपयोग करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी और झूठे मुकदमों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यह न्यायालय का एक मजबूत संदेश है जो ऐसे मामलों में सतर्कता बढ़ाएगा।
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