अमेरिका ने कर दिया ईरान को ‘साफ’! देखिए तबाही का मंजर..
मध्य पूर्व के गर्म होते हालात अब ऐसे मोड़ पर पहुंच चुके हैं जहां से वापसी की गुंजाइश बहुत कम बची है। पिछले कुछ दिनों में इज़राइल और ईरान के बीच भड़की जंग अब इतने खतरनाक मुकाम पर पहुंच गई है कि एक और देश की एंट्री युद्ध को वैश्विक स्तर तक खींच सकती है — और वह देश है अमेरिका। सात दिनों तक चले मिसाइल हमलों, जवाबी हमलों और तबाही के बाद अब ईरान के बेहद करीब अमेरिकी युद्धपोतों की गूंज सुनाई दे रही है। भूमध्य सागर के शांत पानी में अब तीन अमेरिकी स्ट्राइक ग्रुप लहरों को चीरते हुए युद्ध मुद्रा में तैनात हो चुके हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ तौर पर कह दिया है कि उन्होंने ईरान पर हमले की योजना को हरी झंडी दिखा दी है, लेकिन अंतिम आदेश कुछ ही समय की दूरी पर है। उनका यह रहस्यमयी बयान — “मैं ऐसा कर सकता हूं, या नहीं कर सकता। कोई नहीं जानता कि मैं क्या करने जा रहा हूं” — अब रहस्य नहीं रहा, बल्कि स्पष्ट चेतावनी बन गया है।
ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामनेई भले ही अमेरिका की धमकियों को खारिज कर रहे हों और दो टूक कह रहे हों कि वे डरने वालों में से नहीं हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि ईरान अब अमेरिका के सीधे निशाने पर है। यूएसएस गेराल्ड आर फोर्ड, यूएसएस कार्ल विंसन और यूएसएस निमित्ज जैसे घातक स्ट्राइक ग्रुप अब ईरान के सामने समुद्र में खड़े हैं, और उनकी मौजूदगी सिर्फ रणनीतिक नहीं, बल्कि मनोवैज्ञानिक दबाव का भी कारण है। इन स्ट्राइक ग्रुप्स की तैनाती सामान्य बात नहीं है, क्योंकि इनमें मौजूद फाइटर जेट्स, मिसाइल क्रूजर, डेस्ट्रॉयर, पनडुब्बियां और रिफ्यूलिंग शिप मिलकर एक ऐसा सैन्य चक्रव्यूह बनाते हैं जिससे निकल पाना किसी भी देश के लिए नामुमकिन होता है। यही वजह है कि अमेरिका ने अब तक इतने बड़े स्तर पर तीन स्ट्राइक ग्रुप एक साथ एक ही क्षेत्र में तैनात नहीं किए थे — यह उसकी अब तक की सबसे बड़ी मेडिटेरेनियन स्ट्राइक फोर्स तैनाती है।
इस तैनाती का सीधा अर्थ यही है कि अगर ईरान ने इज़राइल या अमेरिका के किसी भी सैन्य या गैर-सैन्य ठिकाने पर हमला किया, तो प्रतिक्रिया केवल एक दिशा से नहीं बल्कि तीनों दिशाओं — समुद्र, आकाश और जमीन — से एकसाथ और बेहद घातक रूप में आएगी। यह रणनीति अमेरिका को तात्कालिक और बहुस्तरीय हमलों की पूरी ताकत देती है। इन स्ट्राइक ग्रुप्स से F-35C फाइटर जेट्स, B-2 और B-52 बॉम्बर्स को न सिर्फ उड़ान की छूट है, बल्कि हवा में ही रिफ्यूलिंग कर उन्हें लंबी दूरी तक भेजने की क्षमता भी मौजूद है। इसके अलावा अमेरिका अब भूमध्य सागर से लेकर लाल सागर तक और सीरिया से लेकर गाजा तक पूरे क्षेत्र की निगरानी करने के लिए तैयार है।
ट्रंप ने अपने बयान में यह भी स्वीकार किया कि वे इस युद्ध से बचना चाहते थे और 60 दिन तक उन्होंने ईरान के साथ बातचीत की कोशिश की, लेकिन ईरान की हठधर्मिता अब उन्हें मजबूर कर रही है कि वह आखिरी फैसला लें। व्हाइट हाउस के बाहर ट्रंप ने पत्रकारों से कहा, “हमें बहुत कम समय मिला है। वो अब व्हाइट हाउस आना चाहते हैं। शायद मैं उनसे मिलूं, शायद नहीं। लेकिन हकीकत ये है कि अब वक्त हाथ से निकल रहा है।” उन्होंने यह भी बताया कि कुछ ही देर में उनकी वॉर रूम में बैठक होने वाली है, जहां जंग से जुड़े अंतिम निर्णय लिए जा सकते हैं। उनका यह बयान कि “मैं आखिरी पल में फैसला करना पसंद करता हूं, खासकर जंग के हालात में,” साफ बताता है कि अमेरिका ने अब सभी विकल्प खोल दिए हैं और ईरान के खिलाफ निर्णायक कदम कभी भी उठाया जा सकता है।
ईरान के लिए सबसे खतरनाक संकेत यही है कि अमेरिका ने अब केवल कूटनीति या दबाव की नीति नहीं अपनाई है, बल्कि उसने जमीनी स्तर पर पूरी सैन्य ताकत लगा दी है। यूएसएस निमित्ज जैसे पोत अब सिर्फ गश्त नहीं कर रहे, बल्कि हर समय फुल स्ट्राइक रेडी स्थिति में हैं। सीरिया, लेबनान, गाजा और फारस की खाड़ी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में अमेरिका की मौजूदगी का मतलब है कि वह किसी भी वक्त किसी भी दिशा से हमला कर सकता है और ईरान को इसका आभास हो चुका है। यही वजह है कि अब तेहरान की ओर से भी तीखे बयान सामने आ रहे हैं, लेकिन वह खुद को घिरा हुआ महसूस कर रहा है।
अमेरिकी कदमों की गंभीरता को इस बात से समझा जा सकता है कि इस तैनाती के बाद ईरान ने अपने परमाणु ठिकानों पर सुरक्षा बढ़ा दी है और पश्चिमी देशों से अपील की है कि वे अमेरिका को रोकें। लेकिन अब अमेरिका अपने फैसले से एक कदम भी पीछे हटता नहीं दिख रहा। ट्रंप की रणनीति चाहे जितनी रहस्यमयी हो, उनका मकसद अब बिल्कुल स्पष्ट है — ईरान को उसकी सीमाओं में रोकना, इज़राइल की रक्षा सुनिश्चित करना और पूरी दुनिया को यह संदेश देना कि अमेरिका जब चाहे, कहीं भी, किसी के भी खिलाफ निर्णायक कार्रवाई कर सकता है।
अब हालात इस मोड़ पर हैं जहां किसी एक मिसाइल, एक हमला या एक गलती इस पूरे क्षेत्र को आग में झोंक सकती है। जंग अब दरवाजे पर दस्तक दे रही है और फैसला केवल अमेरिका के एक इशारे की देरी पर है।
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