कलाकारों से वसूली का गैंग, नाम बड़े और काम डरावने: संस्कृति विभाग के अफसर तक नामजद
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसमें कलाकारों से वसूली, धमकी और सरकारी पैसे की हेराफेरी के आरोप राज्य सरकार के संस्कृति विभाग तक पहुँच गए हैं। इस घोटाले में STF (विशेष कार्यबल) ने एक इवेंट मैनेजर को गिरफ्तार किया है, जबकि संस्कृति विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी भी जांच के घेरे में हैं।
STF ने लखनऊ के विभूति खंड इलाके से इवेंट मैनेजर नील विजय सिंह को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि उसने भारत-नेपाल मैत्री महोत्सव 2024-25 में प्रस्तुति देने वाली एक महिला गायिका से रकम वसूलने के लिए गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई का नाम लेकर धमकी दी थी। इसके अलावा, उसके द्वारा कलाकारों को कम भुगतान करके उन्हें सरकारी खातों से ज्यादा राशि दिलवाने का झांसा दिया गया और बाद में उस पैसे को निकालकर सौंपने का दबाव डाला गया।
धोखाधड़ी का तरीका
महिला गायिका को बहराइच में हुए सांस्कृतिक कार्यक्रम के लिए 35,000 रुपये का भुगतान तय हुआ था, लेकिन शुरुआत में उसके खाते में सिर्फ 30,000 रुपये ही ट्रांसफर किए गए। बाद में उसे एक कैंसल्ड चेक भेजने को कहा गया, जिसके बाद सरकारी कोषागार से उसके खाते में 2,41,000 रुपये ट्रांसफर कर दिए गए। इस पर नील विजय सिंह ने गायिका को धमकाते हुए शेष रकम लौटाने का दबाव बनाया। जब गायिका ने पैसे देने से इनकार किया और धमकियों की जानकारी STF को दी, तब जाकर यह पूरा रैकेट सामने आया।
कहां से आया लॉरेंस बिश्नोई का नाम?
गिरफ्तार इवेंट मैनेजर नील ने पूछताछ में कबूल किया कि वह कलाकारों पर प्रभाव जमाने और डर फैलाने के लिए कुख्यात गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के नाम का इस्तेमाल करता था। इसका उद्देश्य उन्हें चुप कराना और मनचाही रकम वसूलना था।
अंदर तक फैला भ्रष्टाचार
STF की शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि यह वसूली और वित्तीय हेराफेरी का पूरा खेल संस्कृति विभाग के सहायक निदेशक राजेश अहिरवार के इशारे पर चल रहा था। आरोप है कि वे जानबूझकर ऐसे बिल पास कराते थे जिनमें अतिरिक्त राशि ट्रांसफर की जाती थी, और फिर वसूली का दबाव बनाया जाता था।
जांच जारी, कई और चेहरे बेनकाब होने की संभावना
STF ने कहा है कि यह मामला सिर्फ एक इवेंट या कलाकार तक सीमित नहीं है। अब विभाग के और भी अधिकारियों और इवेंट आयोजकों की भूमिका खंगाली जा रही है। संस्कृति विभाग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े हो चुके हैं।
लॉरेंस बिश्नोई जैसे गैंगस्टरों के नाम का इस्तेमाल अब सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहा। जब राज्य के संस्कृति विभाग जैसी संस्थाएं भी इस डर और भ्रष्टाचार के खेल में शामिल हों, तो यह न केवल प्रशासन के लिए चेतावनी है, बल्कि सांस्कृतिक क्षेत्र के लिए भी एक बड़ा संकट बनकर उभरता है। STF की जांच से आने वाले दिनों में और भी चौंकाने वाले खुलासे हो सकते हैं।
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