साइबर ठगी का सिंडिकेट: जब चित्रकूट बना फर्जी सिमकार्ड का गढ़ – यूपी एसटीएफ की बड़ी कार्रवाई में हुआ चौंकाने वाला खुलासा
एक मामूली सा शहर, रोजमर्रा की ज़िंदगी, और कुछ दुकानें—लेकिन इन सबके पीछे छिपा था एक ऐसा रैकेट जिसने पूरे देशभर में साइबर क्राइम की जड़ें फैला रखी थीं। उत्तर प्रदेश का चित्रकूट इन दिनों सुर्खियों में है, और वजह है एक ऐसा खुलासा जिसने न केवल पुलिस महकमे को चौकाया, बल्कि आम नागरिकों के लिए भी खतरे की घंटी बजा दी।
यूपी एसटीएफ ने एक गुप्त अभियान के तहत फर्जी सिमकार्ड रैकेट का भंडाफोड़ किया है, जिसमें 6 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। हैरान करने वाली बात ये है कि इस गिरोह के तार देशभर में फैले साइबर अपराधियों से जुड़े हैं, और यह गिरोह उन्हें अवैध तरीके से सिम कार्ड उपलब्ध कराता था।
टेलीकॉम कंपनियों की मिलीभगत और फर्जी पहचान का खेल
इस संगठित अपराध में कुछ टेलीकॉम कंपनियों के अधिकारियों की भी भूमिका सामने आई है। गिरोह पहले फर्जी पीओएस (प्वाइंट ऑफ सेल) एजेंट तैयार करता था और फिर फर्जी आधार कार्ड व अन्य दस्तावेजों के जरिये हजारों सिम कार्ड एक्टिवेट करवा लेता था। इन सिमकार्ड्स को आगे साइबर क्रिमिनल्स को बेच दिया जाता था, जो डिजिटल अरेस्ट, स्टॉक मार्केट स्कैम, पार्सल धोखाधड़ी जैसे अपराधों में इनका उपयोग करते थे।
10 हजार से ज्यादा फर्जी सिम कार्ड का नेटवर्क
गिरफ्तार किए गए लोगों से पूछताछ में यह साफ हुआ है कि अब तक यह गिरोह 10,000 से ज्यादा फर्जी सिम कार्ड एक्टिवेट करा चुका है। इनका इस्तेमाल ठगी, डिजिटल फ्रॉड और दूसरे ऑनलाइन अपराधों में किया जा रहा था। इस पूरी गतिविधि से जुड़े लोग इतने शातिर थे कि सामान्य ग्राहक या कंपनी को भनक तक न लगे।
शिकायतों से शुरू हुई जांच, बनी एसटीएफ की खास टीम
लंबे समय से यूपी एसटीएफ को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि साइबर क्राइम करने वाले गिरोहों को कुछ पीओएस एजेंट और डिस्ट्रीब्यूटर अवैध तरीके से सिम कार्ड मुहैया करा रहे हैं। जब यह समझ आया कि मामला सिर्फ एक-दो लोगों का नहीं, बल्कि एक बड़े सिंडिकेट का है, तो एसटीएफ ने विशेष टीम बनाई। अपर पुलिस अधीक्षक विशाल विक्रम सिंह के नेतृत्व में एक गहन जांच अभियान शुरू हुआ।
चित्रकूट बना साजिश का केंद्र
जहां एक ओर इस पवित्र नगरी को धार्मिक आस्था के लिए जाना जाता है, वहीं अब यह मामला सामने आने से एक स्याह चेहरा भी उजागर हुआ है। गिरोह यहीं से ऑपरेट कर रहा था और सैकड़ों किलोमीटर दूर तक सिम कार्ड भेजे जा रहे थे।
अगला कदम और गहराती जांच
एसटीएफ की टीम अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में है। साथ ही टेलीकॉम कंपनियों की भूमिका की भी गहन जांच हो रही है। यह पूरा मामला साइबर क्राइम की उस परत को उजागर करता है, जो आम लोगों की पहचान, बैंकिंग और डिजिटल सुरक्षा को खतरे में डाल सकता है।
यह कार्रवाई न केवल यूपी पुलिस की एक बड़ी सफलता है, बल्कि यह भी दिखाती है कि आज के दौर में डिजिटल सुरक्षा केवल एक तकनीकी विषय नहीं, बल्कि एक सामाजिक और कानूनी जिम्मेदारी भी है। चित्रकूट से पकड़े गए इस गिरोह ने जिस तरह से साइबर क्राइम को बढ़ावा देने वाले तंत्र को मजबूत किया था, उसे तोड़ना एक जरूरी कदम था—और यूपी एसटीएफ ने यह कर दिखाया।
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