April 17, 2026

लखनऊ के पॉश अपार्टमेंट में बिजली गुल… 192 परिवारों की रात अंधेरे में, जब एक लाइनमैन की नाराजगी बनी आफत की वजह

सब कुछ सामान्य चल रहा था—एसी की ठंडी हवा, एलिवेटर की आवाजें और डिजिटल मीटर की गिनती। लेकिन अचानक, लखनऊ के गोमतीनगर विस्तार स्थित यमुना अपार्टमेंट में चारों ओर हड़कंप मच गया। कुल 192 फ्लैट्स में एक साथ बिजली गुल हो गई। लोग सोच भी नहीं सके थे कि यह किसी तकनीकी खराबी का नहीं, बल्कि एक नाराज लाइनमैन की ‘सजा’ का नतीजा था।

पूरा मामला एक उपभोक्ता और बिजली विभाग के संविदा लाइनमैन के बीच हुए विवाद से शुरू हुआ। अपार्टमेंट के फ्लैट नंबर N703 में रहने वाले ललन सिंह का कहना है कि उनके स्मार्ट मीटर की बिलिंग तिथि 19 मई थी, लेकिन 16 मई को ही लेसा विभाग ने उनकी बिजली काट दी। ललन ने इसपर अधिशासी अभियंता प्रभाकर सिंह से संपर्क किया, जिन्होंने इसे गलती बताया और बिजली जल्द बहाल करने का भरोसा दिया।

लेकिन मामला यहीं नहीं रुका। ललन ने जब लाइनमैन अनुज कुमार को फोन किया और बिजली जोड़ने का अनुरोध किया, तो दोनों के बीच तीखी बहस हो गई। कुछ ही देर में स्थिति और बिगड़ गई। लाइनमैन अनुज, करीब 10 लोगों के साथ पांच बाइकों पर अपार्टमेंट के गेट पर आ धमका। गाली-गलौज हुई और ललन सिंह इसकी शिकायत लेकर उपकेंद्र पहुंचे, जहां दोनों पक्षों में हाथापाई हो गई।

इस घटना से बौखलाए लाइनमैन ने पूरे यमुना अपार्टमेंट की बिजली ही काट दी। देखते ही देखते 192 फ्लैट्स में अंधेरा छा गया, लिफ्ट बंद हो गईं, पानी की मोटरें ठप हो गईं और बुजुर्गों व बच्चों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। लोगों ने जब इसकी सूचना उच्चाधिकारियों को दी, तब जाकर अधिकारियों ने हस्तक्षेप करते हुए बिजली बहाल कराई।

यह घटना कई गंभीर सवाल खड़े करती है:

क्या संविदा कर्मचारी अपनी शक्तियों का दुरुपयोग कर सकते हैं?

क्या तकनीकी लापरवाही और निजी झगड़े के चलते आम लोगों की सुविधाएं बाधित की जा सकती हैं?

और सबसे अहम, ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए विभाग के पास क्या तंत्र है?

इस घटना के बाद यमुना अपार्टमेंट के निवासी डरे हुए हैं और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। वहीं, बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। अगर समय रहते अधिकारी हस्तक्षेप न करते, तो स्थिति और भी गंभीर हो सकती थी।

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