ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी होते ही उत्तर प्रदेश में सियासत गरम, विपक्ष ने बताया साजिश तो BJP ने शुरू किया डैमेज कंट्रोल मोड
उत्तर प्रदेश में चुनाव आयोग द्वारा स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया के तहत जारी की गई ड्राफ्ट वोटर लिस्ट ने सियासी हलचल तेज कर दी है। 6 जनवरी को जारी सूची में करीब 2.89 करोड़ वोटर्स के नाम हटाए गए हैं, जिससे राज्य में कुल मतदाताओं की संख्या 15.44 करोड़ से घटकर 12.55 करोड़ रह गई है। इस बड़े पैमाने पर कटौती के बाद विपक्ष ने जहां इसे लोकतंत्र के खिलाफ साजिश करार दिया है, वहीं सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के भीतर भी चिंता का माहौल बन गया है।
चुनाव आयोग के मुताबिक SIR के तहत बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLO) ने घर-घर जाकर सर्वे किया। इस प्रक्रिया में 46.23 लाख मृत मतदाता, 2.17 करोड़ स्थायी रूप से माइग्रेट हो चुके वोटर्स और 25.47 लाख डुप्लीकेट नाम सामने आए। आयोग का दावा है कि ड्राफ्ट लिस्ट में 81.30 फीसदी नाम बरकरार रखे गए हैं, लेकिन करीब 18.70 फीसदी वोटर्स की कटौती ने राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया। विपक्षी दलों का आरोप है कि बड़ी संख्या में वास्तविक और पात्र मतदाताओं के नाम काट दिए गए हैं।
BJP के लिए यह मामला इसलिए ज्यादा संवेदनशील बन गया है क्योंकि पार्टी के आंतरिक आकलन के अनुसार कटे हुए नामों में उसके कोर वोटर्स की संख्या अधिक है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहले ही कार्यकर्ताओं को संकेत दे चुके हैं कि हटाए गए वोटर्स में 85 से 90 फीसदी तक पार्टी समर्थक हो सकते हैं। इसी आशंका के चलते ड्राफ्ट लिस्ट जारी होते ही मुख्यमंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सांसदों, विधायकों, मंत्रियों और संगठन पदाधिकारियों के साथ अहम बैठक की।
बैठक में सीएम योगी ने साफ निर्देश दिए कि जिन पात्र मतदाताओं के नाम कट गए हैं, उन्हें हर हाल में दोबारा जुड़वाया जाए। इसके लिए सांसदों, विधायकों और मंत्रियों को बूथ स्तर तक सक्रिय होने का टारगेट दिया गया है। पार्टी ने राज्यभर के करीब 1.62 लाख बूथों पर फॉर्म-6 बांटने शुरू कर दिए हैं और कार्यकर्ता घर-घर जाकर युवाओं, शादी के बाद पता बदलने वाली महिलाओं और नए बसे लोगों को मतदाता सूची में जोड़ने में जुट गए हैं। साथ ही अपात्र और डुप्लीकेट नामों पर आपत्ति दर्ज कराने के भी निर्देश दिए गए हैं।
वहीं समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने पूरे मामले को BJP की साजिश बताया है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय और सपा नेताओं का कहना है कि लाखों असली वोटर्स के नाम बिना वजह काटे गए हैं, जबकि उनके पास सभी जरूरी दस्तावेज मौजूद हैं। विपक्ष ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग भी की है। चुनाव आयोग ने दावा-आपत्ति के लिए 6 जनवरी से 6 फरवरी 2026 तक का समय दिया है, जबकि फाइनल वोटर लिस्ट 6 मार्च को जारी होगी। ऐसे में आने वाले हफ्तों में यह मुद्दा उत्तर प्रदेश की राजनीति में और ज्यादा गर्माने के संकेत दे रहा है।
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