ट्रंप का दावा: भारत जल्द करेगा ट्रेड डील, लेकिन भारत की चुप्पी बनी रहस्य, अमेरिका में डील की तैयारी में जुटे गोयल
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर भारत के साथ व्यापार समझौते को लेकर बड़ा बयान दिया है। ट्रंप ने फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में दावा किया कि अमेरिका और भारत के बीच जल्द ही एक ट्रेड डील फाइनल हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत अमेरिका से आने वाले उत्पादों पर लगने वाले 100% तक के टैरिफ में कटौती करने को तैयार है। हालांकि, भारत की तरफ से इस बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया अब तक नहीं दी गई है, जिससे इस दावे की वास्तविकता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
पीयूष गोयल अमेरिका में डील की तैयारी में जुटे
इस बीच, भारत के वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल इन दिनों अमेरिका के दौरे पर हैं, जहां वे वाशिंगटन डी.सी. में अमेरिकी अधिकारियों से प्रस्तावित व्यापार समझौते पर बातचीत कर रहे हैं। माना जा रहा है कि गोयल की मुलाकात अमेरिकी वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लुटनिक और यूएस ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव जैमीसन ग्रीर से होने वाली है। यह बैठक इस डील के भविष्य की दिशा तय कर सकती है।
भारत की सतर्क प्रतिक्रिया: “डील दोनों के हित में होनी चाहिए”
हालांकि भारत की तरफ से अब तक कोई स्पष्ट जवाब नहीं आया है, लेकिन विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने हाल ही में नई दिल्ली में कहा था कि कोई भी व्यापार समझौता तभी संभव है जब वह दोनों देशों के लिए फायदेमंद हो। इस बयान से संकेत मिलता है कि भारत फिलहाल किसी दबाव में डील साइन करने के मूड में नहीं है।
ट्रंप की आलोचना और दबाव की राजनीति
ट्रंप ने एक बार फिर भारत को दुनिया का “सबसे ज्यादा टैरिफ लगाने वाला देश” बताया और आरोप लगाया कि भारत ने अमेरिकी व्यापार को लगभग असंभव बना दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि “हर देश अमेरिका से डील करना चाहता है, लेकिन मैं हर किसी से डील नहीं कर सकता”। ट्रंप के इन बयानों को दबाव की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है, जिससे भारत को जल्द से जल्द एकतरफा रियायतों के लिए मनाया जा सके।
ट्रंप का बयान भले ही आक्रामक हो, लेकिन भारत की रणनीति साफ है — कोई भी समझौता संतुलित और पारस्परिक हितों को ध्यान में रखकर ही किया जाएगा। आने वाले दिनों में पीयूष गोयल की अमेरिका यात्रा इस बहुप्रतीक्षित ट्रेड डील को लेकर तस्वीर स्पष्ट कर सकती है। फिलहाल, भारत की चुप्पी और अमेरिका की आक्रामकता के बीच यह डील एक राजनीतिक दांव-पेंच और रणनीतिक संतुलन का विषय बनी हुई है।
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