April 20, 2026

अमेरिका ने व्यापार युद्ध में खोला चौतरफा मोर्चा, ट्रंप के टैरिफ आदेशों से दुनिया भर में मच सकती है हलचल!

दुनिया ने हाल के वर्षों में रूस-यूक्रेन युद्ध, इजरायल-ईरान संघर्ष जैसी बड़ी वैश्विक संकटों को देखा है, लेकिन अब अमेरिका ने बिना कोई सैन्य हमले किए व्यापारिक मोर्चे पर पूरी दुनिया के साथ एक नया युद्ध छेड़ दिया है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत के बाद एक बार फिर से ‘टैरिफ वॉर’ या ‘ट्रेड वॉर’ को बढ़ावा दिया है, जिसके परिणामस्वरूप अब पूरी दुनिया की इकोनॉमी पर दबाव बढ़ने का अंदेशा जताया जा रहा है। ट्रंप का यह व्यापार युद्ध अब सिर्फ चीन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उनके टैरिफ आदेशों का असर यूरोप, एशिया और दक्षिण एशिया समेत दुनिया के कई देशों पर पड़ने वाला है।

अमेरिका के राष्ट्रपति बनने के महज 65 दिन बाद डोनाल्ड ट्रंप ने टैरिफ वॉर को एक नई दिशा दी है, जिसमें अब तक 16 आदेश जारी किए जा चुके हैं। इन आदेशों के जरिए ट्रंप ने न केवल अपने मित्र देशों को टैरिफ के जरिए दबाव में डालने की कोशिश की है, बल्कि दुश्मन देशों के लिए भी व्यापारिक प्रतिबंधों का सिलसिला जारी रखा है। इन टैरिफ आदेशों का सबसे ज्यादा असर भारत, चीन, यूरोप और कई दक्षिण एशियाई देशों पर देखने को मिलेगा।

ट्रंप के टैरिफ आदेश: 65 दिनों में कौन सा आदेश कब दिया गया?

  • 20 जनवरी 2025: जैसे ही डोनाल्ड ट्रंप ने ओवल ऑफिस में कदम रखा, उन्होंने विदेशी देशों पर टैरिफ लगाने और कर लगाने की बात की। उन्होंने कनाडा और मैक्सिको पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाने की योजना की घोषणा की, जबकि चीन से आयातित वस्तुओं पर टैक्स लगाने की योजना को तुरंत विस्तार से नहीं बताया।
  • 26 जनवरी 2025: कोलंबियाई राष्ट्रपति के अमेरिकी सैन्य विमानों को अस्वीकार करने के बाद, ट्रंप ने कोलंबिया पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाने की धमकी दी। इस पर कोलंबिया ने जवाबी कार्रवाई करते हुए अमेरिकी उत्पादों पर टैरिफ बढ़ा दिया।
  • 1 फरवरी 2025: ट्रंप ने कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर करते हुए मेक्सिको, कनाडा और चीन से आयातित वस्तुओं पर टैरिफ लागू किया। चीन से 10 प्रतिशत और कनाडा, मेक्सिको से 25 प्रतिशत टैरिफ लगाया गया।
  • 3 फरवरी 2025: मेक्सिको और कनाडा के खिलाफ टैरिफ को 30 दिन के लिए स्थगित कर दिया गया, क्योंकि दोनों देशों ने सीमा सुरक्षा और मादक पदार्थों की तस्करी को लेकर आश्वासन दिया।
  • 10 फरवरी 2025: ट्रंप ने स्टील और एल्युमीनियम पर टैरिफ बढ़ाने की घोषणा की और 2018 में दी गई छूट को हटा दिया, जिसके बाद इन धातुओं पर कम से कम 25 प्रतिशत शुल्क लागू हो गया।
  • 13 फरवरी 2025: ट्रंप ने अपने व्यापारिक साझेदारों द्वारा लगाए गए कर दरों के जवाब में 25 प्रतिशत टैरिफ यूरोपीय देशों पर लगाने का प्रस्ताव दिया। उन्होंने भारत सहित अन्य देशों के लिए भी उच्च टैरिफ की बात की।
  • 1 मार्च 2025: ट्रंप ने लकड़ी और इमारती लकड़ी पर टैरिफ लगाने की योजना की घोषणा की, यह कदम निर्माण उद्योग और सेना की आपूर्ति को प्रभावित कर सकता है।
  • 24 मार्च 2025: वेनेजुएला से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाने की घोषणा की, जिसका सबसे ज्यादा असर चीन पर पड़ने की संभावना है, जो वेनेजुएला से 68 प्रतिशत तेल आयात करता है।
  • 26 मार्च 2025: ट्रंप ने ऑटो आयात पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाने का आदेश जारी किया, जिससे वाहन निर्माताओं के बीच चिंता बढ़ गई है, क्योंकि ये कंपनियां वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर निर्भर हैं।

क्या है टैरिफ वॉर का असर?

ट्रंप के इन टैरिफ आदेशों का असर पूरी दुनिया में महसूस होने वाला है। यूरोप, चीन, भारत जैसे बड़े देशों ने इन आदेशों के खिलाफ जवाबी कदम उठाए हैं और विभिन्न उत्पादों पर शुल्क लगाने की घोषणाएं की हैं। इन व्यापारिक प्रतिबंधों का सीधा असर इन देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ रहा है, और आने वाले समय में इनका असर दुनिया की व्यापारिक गतिविधियों पर साफ तौर पर दिखेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका के इस टैरिफ वॉर का सबसे ज्यादा असर एशियाई देशों, विशेषकर भारत और चीन पर देखने को मिलेगा। जहां एक तरफ अमेरिका ने अपने उद्योगों के हितों को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया है, वहीं दूसरी तरफ दुनियाभर के उपभोक्ताओं को इसके खतरनाक प्रभावों का सामना करना पड़ सकता है।

क्या होगा आगे?

ट्रंप के टैरिफ आदेशों से सिर्फ व्यापारिक तनाव बढ़ने की संभावना है, बल्कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में भी गड़बड़ी आ सकती है। इस युद्ध के दौरान जिस तरह से चीन, यूरोप और अन्य देशों ने जवाबी कदम उठाए हैं, उससे साफ है कि यह व्यापार युद्ध एक लंबी और जटिल प्रक्रिया में बदल सकता है। अमेरिका के इन फैसलों से दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में उथल-पुथल मच सकती है और इसका प्रभाव वैश्विक मुद्रास्फीति, व्यापार घाटे और आर्थिक विकास पर भी पड़ने वाला है।

अब यह देखना होगा कि ट्रंप का यह टैरिफ वॉर आगे क्या दिशा लेता है और क्या यह आने वाले समय में पूरी दुनिया के व्यापार को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारकों में से एक बन जाएगा।

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