राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मुस्लिम ब्रदरहुड की चुनिंदा शाखाओं को विदेशी आतंकी संगठन घोषित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। 24 नवंबर को साइन किए गए कार्यकारी आदेश के तहत उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों को निर्देश दिया है कि वे संगठन के उन चैप्टर्स की पहचान करें जो हिंसक गतिविधियों में शामिल रहे हैं या उनका प्रत्यक्ष समर्थन करते हैं। यह कदम ऐसे समय में आया है जब इजराइल और उसके क्षेत्रीय सहयोगी लंबे समय से मुस्लिम ब्रदरहुड की गतिविधियों को लेकर अमेरिका के सामने अपनी सुरक्षा चिंताएँ रखते रहे हैं। ट्रंप का यह निर्णय इस आंदोलन के खिलाफ अब तक की सबसे सख्त अमेरिकी कार्यवाही मानी जा रही है, जो 1928 में मिस्र में स्थापित पैन-इस्लामिस्ट विचारधारा से प्रेरित संगठन है।
आदेश में स्पष्ट किया गया है कि विदेश मंत्री और वित्त मंत्री को 30 दिनों के भीतर एक संयुक्त रिपोर्ट सौंपनी होगी, जिसमें यह बताया जाएगा कि मुस्लिम ब्रदरहुड की किन शाखाओं को कानूनी रूप से Foreign Terrorist Organization घोषित किया जा सकता है। यह प्रक्रिया अमेरिकी अटॉर्नी जनरल और राष्ट्रीय खुफिया निदेशक के परामर्श से आगे बढ़ेगी। रिपोर्ट जमा होने के बाद संबंधित विभागों को 45 दिनों का समय दिया जाएगा ताकि वे Immigration and Nationality Act और International Emergency Economic Powers Act के तहत आधिकारिक कार्रवाई शुरू कर सकें। इस तरह की नामांकन प्रक्रिया का इस्तेमाल अमेरिका पहले भी उन विदेशी संगठनों के खिलाफ करता रहा है जिन पर आतंकवाद या उसके वित्तीय समर्थन का आरोप होता है।
व्हाइट हाउस के अनुसार, आदेश का फोकस केवल उन शाखाओं पर है जिन पर लेबनान, जॉर्डन और मिस्र जैसे क्षेत्रों में हिंसक गतिविधियों में शामिल होने या उन्हें समर्थन देने का आरोप है। आदेश में यह भी कहा गया है कि 7 अक्टूबर 2023 के हमले के बाद मुस्लिम ब्रदरहुड से जुड़े कुछ गुटों ने हमास, हिजबुल्लाह और अन्य फ़िलिस्तीनी समूहों के साथ मिलकर इजराइल पर रॉकेट दागे थे। हालांकि, ट्रंप प्रशासन ने साफ किया है कि यह कार्रवाई किसी भी अमेरिकी-आधारित संगठन को निशाना नहीं बनाएगी, और केवल उन्हीं अंतरराष्ट्रीय शाखाओं पर केंद्रित होगी जिनकी गतिविधियाँ कानूनन आतंकवाद की परिभाषा में आती हैं।
मध्य पूर्व की राजनीति में मुस्लिम ब्रदरहुड एक महत्वपूर्ण शक्ति रहा है। इसकी कुछ शाखाएँ चुनावी राजनीति में सक्रिय हैं, जबकि कई देशों में यह प्रतिबंधित है। मिस्र और सऊदी अरब पहले ही इसे आतंकी संगठन घोषित कर चुके हैं। 2013 में जॉर्डन ने भी इसे बैन किया था और हाल ही में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने अपने देश में संगठन के प्रभाव को सीमित करने के लिए कदम उठाने का निर्देश दिया था। कई विशेषज्ञ मानते हैं कि यह कदम क्षेत्रीय राजनीति पर गहरा प्रभाव डाल सकता है और मुस्लिम ब्रदरहुड से जुड़े राजनीतिक समूहों पर दबाव बढ़ा सकता है।
मुस्लिम ब्रदरहुड की वैचारिक जड़ें इस्लामिक सिद्धांतों के पुनर्जीवन और पश्चिमी प्रभावों का मुकाबला करने पर आधारित रही हैं। इसके संस्थापक हसन अल-बन्ना का मानना था कि मुस्लिम समाज को मजबूत इस्लामी मूल्यों के जरिये ही वैश्विक राजनीतिक चुनौतियों से निपटने की क्षमता मिल सकती है। समय के साथ संगठन कई देशों में फैला और गुप्त तथा राजनीतिक दोनों तरह की गतिविधियों में शामिल होता गया। अब अमेरिकी प्रशासन के इस नए कदम से संगठन की वैश्विक गतिविधियों और उसके समर्थकों पर व्यापक प्रभाव पड़ने की संभावना है।
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