भारत ने टेस्ला के लिए खोले दरवाज़े, चीन की कंपनियों को दिखाया बाहर का रास्ता!
भारत में टेस्ला की एंट्री को लेकर बड़ा कदम उठाया गया है। केंद्र सरकार ने चीन की दो बड़ी ऑटो कंपनियों के निवेश प्रस्तावों को खारिज कर दिया है ताकि एलन मस्क की कंपनी टेस्ला को किसी बड़े कॉम्पटीशन से बचाया जा सके। इससे साफ है कि भारत अब रणनीतिक रूप से चीन से दूरी बनाकर अमेरिका के करीब जाता दिख रहा है।
ट्रंप और भारत की ‘गहरी’ ट्यूनिंग?
पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एशियाई देशों पर रेसिप्रोकल टैरिफ को लेकर कई बार कड़े रुख अपनाए हैं। चीन पर तो ट्रंप ने 50% तक टैरिफ लगाने की बात कह दी है, जबकि भारत पर सिर्फ 26% टैरिफ है – जो बताता है कि भारत को अमेरिका के नजरिए से एक अहम बाजार माना जा रहा है।
भारत एक ऐसा देश है, जिसकी ज़रूरत अमेरिका, यूरोप, और चीन – सभी को है। ऐसे में अमेरिका अपने सबसे करीबी उद्योगपति एलन मस्क की कंपनी टेस्ला को भारत में उतारना चाहता है, ताकि एशिया में अपनी पकड़ मज़बूत कर सके और टेस्ला का चीन पर निर्भरता खत्म हो सके।
BYD को झटका, टेस्ला को बढ़त
सरकार ने चीन की सबसे बड़ी इलेक्ट्रिक वाहन निर्माता BYD के भारत में निवेश प्रस्ताव को ठुकरा दिया है। केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने साफ कहा है कि भारत को तय करना होगा कि किन निवेशकों को देश में प्रवेश की अनुमति दी जाए, ताकि रणनीतिक हित सुरक्षित रहें।
टेस्ला पर बड़ा दांव
सरकार की मंशा अब साफ है – टेस्ला को भारत में मजबूत प्लेटफॉर्म देना और चीन की कंपनियों की हिस्सेदारी को सीमित करना। इससे न सिर्फ देश में हाईटेक EV तकनीक को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि वैश्विक निवेशकों को भी भारत में निवेश के लिए प्रोत्साहन मिलेगा।
भारत अब अपनी निवेश नीति को केवल आर्थिक नहीं, बल्कि रणनीतिक नजरिए से देख रहा है। टेस्ला की एंट्री और चीन की कंपनियों पर रोक इसी दिशा में बड़ा कदम है। इससे भारत को ग्लोबल EV मार्केट में एक नई पहचान मिल सकती है।
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