April 17, 2026
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19 फरवरी 2026 को फाल्गुन मास की शुक्ल द्वितीया तिथि है और आज फुलेरा दूज का पावन पर्व भी मनाया जा रहा है। कुंभ राशि में सूर्यदेव, बुधदेव, शुक्रदेव और राहु का संयोग आपके विचारों को स्पष्टता और कला के प्रति प्रेम को बढ़ाने की अच्छी संभावना दिखा रहा है। चंद्रदेव आज पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में गोचर कर रहे हैं, जो आपके स्वभाव में ईमानदारी, बुद्धिमानी और भावुकता का संचार करेंगे। मकर राशि में स्थित उच्चस्थ मंगलदेव आपके भीतर लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए जरूरी आत्मविश्वास और जोश बनाए रखेंगे।

 

आज फुलेरा दूज का दिन है, जिसे ज्योतिष में अबूझ मुहूर्त माना जाता है, इसलिए आज नए कार्यों का श्रीगणेश करना अत्यंत शुभ रहेगा। शुभ कार्यों के लिए दोपहर 12:13 से 12:58 तक के अभिजीत मुहूर्त का उपयोग करना लाभकारी रहेगा। दोपहर 02:00 से 03:25 तक राहुकाल रहेगा, इस समय थोड़ा सावधान रहें और प्रभु भक्ति में मन लगाएं।

 

महत्वपूर्ण विवरण

तिथि: शुक्ल द्वितीया – सायं 03:58 बजे तक

योग: सिद्ध – सायं 08:42 बजे तक

करण: कौलव – सायं 03:58 बजे तक

करण: तैतिल – प्रातः 03:21 बजे तक (20 फरवरी)

सूर्य और चंद्रमा की स्थिति

सूर्योदय का समय: प्रातः 06:56 बजे

सूर्यास्त का समय: सायं 06:14 बजे

चंद्रोदय का समय: प्रातः 07:54 बजे

चंद्रास्त का समय: सायं 08:11 बजे

 

समस्त नव ग्रहों की की राशियां (प्रात: 06: 00 बजे)

सूर्य देव: कुंभ राशि में स्थित हैं।

चन्द्र देव: कुंभ राशि में स्थित हैं।

मंगल देव: मकर राशि में स्थित हैं।

बुध देव: कुंभ राशि में स्थित हैं।

गुरु बृहस्पति: मिथुन राशि में स्थित हैं।

शुक्र देव: कुंभ राशि में स्थित हैं।

शनि देव: मीन राशि में स्थित हैं।

राहु: कुंभ राशि में स्थित हैं।

केतु: सिंह राशि में स्थित हैं।

 

आज के शुभ मुहूर्त

अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:13 बजे से दोपहर 12:58 बजे तक

अमृत काल: दोपहर 01:00 बजे से दोपहर 02:34 बजे तक

 

आज के अशुभ समय

राहुकाल: दोपहर 02:00 बजे से दोपहर 03:25 बजे तक

गुलिकाल: प्रातः 09:46 बजे से प्रातः 11:10 बजे तक

यमगण्ड: प्रातः 06:56 बजे से प्रातः 08:21 बजे तक

 

आज का नक्षत्र

आज चंद्रदेव पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में विराजमान रहेंगे।

पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र: सायं 08:52 बजे तक

नक्षत्र स्वामी: बृहस्पतिदेव

राशि स्वामी: शनिदेव और बृहस्पतिदेव

देवता: अज एकपाद (अग्नि के रुद्र रूप)

प्रतीक: शवपेटिका या अर्थी (मृत्यु के पश्चात प्रयुक्त होने वाला वाहन)

सामान्य विशेषताएं: आशावादी, ईमानदार, विश्वसनीय, संगीत-प्रेमी, कला-प्रेमी, विनम्र, उदार, बुद्धिमान, वक्ता, संवेदनशील, ईर्ष्यालु, लालची, क्रोधी, अनिश्चित।

 

आज फुलेरा दूज है

फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को फुलेरा दूज का पावन पर्व मनाया जाता है। यह उत्सव विशेष रूप से भगवान श्री कृष्ण और राधा रानी की भक्ति को समर्पित है। इस दिन मंदिरों में ठाकुर जी का फूलों से भव्य श्रृंगार किया जाता है और उन्हें गुलाल अर्पित किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इसी दिन से होली के पर्व की शुरुआत मानी जाती है। भक्तजन भजन-कीर्तन के माध्यम से अपनी श्रद्धा प्रकट करते हैं और प्रेम के इस उत्सव में आनंद लेते हैं।

 

ज्योतिषीय दृष्टि से फुलेरा दूज को अबूझ मुहूर्त माना जाता है। इस दिन विवाह और नए कार्यों का श्रीगणेश करना अत्यंत शुभ होता है। बेहतर मार्गदर्शन और जीवन के सही संचालन के लिए आप एस्ट्रोपत्री के ज्योतिषियों से बात कर सकते हैं।

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