इस्लामाबाद: तालिबान से टकराव की राह पर पाकिस्तान, अमेरिका के इशारे पर जंग की तैयारी का आरोप
अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है. तालिबान सरकार के प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद ने दावा किया है कि पाकिस्तान अमेरिका के इशारे पर तालिबान के खिलाफ युद्ध छेड़ने की तैयारी कर रहा है. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की मुनीर आर्मी अब अमेरिका का मोहरा बन गई है और उसका असली मकसद बगराम एयरबेस पर कब्जा जमाना है. तालिबान प्रवक्ता के मुताबिक, “हम पाकिस्तान की हर चाल से वाकिफ हैं और समय आने पर इसका जवाब देंगे.”
तालिबान का यह आरोप ऐसे समय पर आया है जब बगराम एयरबेस का नियंत्रण भू-राजनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है. यह एयरबेस चीन के परमाणु ठिकाने से करीब 100 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका पिछले कुछ महीनों से इस बेस को फिर से अपने कब्जे में लेने की कोशिश कर रहा है. इस कवायद में पाकिस्तान को सहयोगी के तौर पर तैयार किया गया है. बताया जा रहा है कि पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर को व्हाइट हाउस दो बार बुलाया गया था, जिसके बाद से ही तालिबान और पाकिस्तान के रिश्ते और खराब हो गए.
तालिबान के विदेश मंत्री आमिर खान मुताकी ने भी पाकिस्तान पर गंभीर आरोप लगाए हैं. मुताकी ने कहा कि पाकिस्तान उनसे सुरक्षा की गारंटी मांग रहा है, जबकि यह उसका खुद का काम है. “हम पाकिस्तान की जमीन की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार नहीं हैं,” उन्होंने कहा. तालिबान का कहना है कि पाकिस्तान ने यह तय कर लिया है कि उसे बातचीत नहीं, बल्कि जंग का रास्ता अपनाना है.
दूसरी ओर, इस बढ़ते तनाव को काबू में करने के लिए तुर्की और ईरान मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं. इस्तांबुल में दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच छह दौर की बातचीत हो चुकी है, लेकिन स्थाई युद्धविराम पर सहमति नहीं बन पाई है. तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोआन ने घोषणा की है कि उनके विदेश मंत्री जल्द ही इस्लामाबाद और फिर काबुल का दौरा करेंगे. वहीं, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघाची ने भी पाकिस्तान के डिप्टी पीएम इशाक डार से संपर्क साधकर शांति बहाल करने की पहल की है.
स्थिति अब बेहद संवेदनशील हो चुकी है. अगर पाकिस्तान और तालिबान के बीच यह टकराव युद्ध में बदलता है, तो इसका असर न सिर्फ दक्षिण एशिया बल्कि चीन और ईरान जैसे देशों की सुरक्षा नीति पर भी गहरा पड़ेगा. तालिबान ने साफ कहा है कि बगराम बेस को लेकर किसी भी विदेशी दखल को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा — चाहे वो पाकिस्तान ही क्यों न हो.
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