ट्रंप की टैरिफ ताजपोशी या वैश्विक आर्थिक सुनामी? सऊदी अरब में 5 सालों की सबसे बड़ी गिरावट, अरब देशों में मचा हड़कंप!
दुनियाभर के बाजार पहले ही डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ बम से उबर नहीं पाए थे कि अब सऊदी अरब में आर्थिक भूकंप जैसे हालात पैदा हो गए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा घोषित रेसिप्रोकल टैरिफ के असर से सऊदी स्टॉक मार्केट में एक ही दिन में 7% की भारी गिरावट दर्ज की गई—जो बीते पांच वर्षों की सबसे बड़ी गिरावट मानी जा रही है।
अरामको भी नहीं बची, अरबों डॉलर का नुकसान
इस गिरावट ने न सिर्फ निवेशकों के होश उड़ा दिए, बल्कि सऊदी की तेल दिग्गज कंपनी अरामको को भी ज़बरदस्त झटका दिया।
सरकारी मीडिया अल-एखबारिया के मुताबिक, सऊदी इंडेक्स में 800 अंकों से अधिक की गिरावट हुई, जबकि वित्तीय अखबार अल-इक्तिसादिया के अनुसार सिर्फ अरामको को 90 बिलियन डॉलर का नुकसान हुआ। कंपनी के शेयर 6.2% तक टूट गए—जो कोविड-19 महामारी के बाद से सबसे बड़ी गिरावट है।
मिडिल ईस्ट में लहराया लाल झंडा
सऊदी अरब ही नहीं, कतर, कुवैत और मिस्र के बाजार भी इस टैरिफ सुनामी की चपेट में आ गए हैं:
कतर स्टॉक एक्सचेंज: 4.2% गिरावट, नेशनल बैंक और इंडस्ट्रीज कतर को तगड़ा झटका
कुवैत: 5.7% की गिरावट, प्रमुख इंडेक्स ढहते नजर आए
मिस्र (EGX30): 3.3% की गिरावट, निवेशकों में बेचैनी
यह एक साफ संकेत है कि टैरिफ के इस झंझावात से खाड़ी देशों की अर्थव्यवस्थाएं भी अछूती नहीं रहने वालीं।
ट्रंप के करीबी भी नहीं बचे
चौंकाने वाली बात यह है कि जिन देशों को ट्रंप के करीबी माना जाता है—इज़राइल और सऊदी अरब—वो भी इस नीति की मार से नहीं बच सके हैं।
इज़राइल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू खुद टैरिफ पर बातचीत के लिए अमेरिका में हैं, और खबर है कि 50 से अधिक देशों ने टैरिफ मीटिंग के लिए अमेरिकी प्रशासन से संपर्क किया है।
अभी तो शुरुआत है?
विशेषज्ञों का मानना है कि ये शुरुआती संकेत हैं और अगर टैरिफ युद्ध यूं ही चलता रहा तो तेल बाजार, वैश्विक व्यापार, और उभरती अर्थव्यवस्थाओं पर इसका असर और गहरा होगा।
सवाल यह है—क्या यह अमेरिका की आर्थिक जीत की शुरुआत है, या पूरी दुनिया को मंदी के मुहाने तक ले जाने वाला फैसला?
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