April 17, 2026

Sovereign Gold Bond: सोने से भी ज्यादा फायदे का सौदा बना SGB, निवेशकों को मिला 377% तक रिटर्न, जानें पूरी जानकारी

सोने को हमेशा से सुरक्षित निवेश का विकल्प माना जाता रहा है, लेकिन हाल के वर्षों में सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) ने निवेशकों को सीधे सोने से भी ज्यादा शानदार रिटर्न देकर सबका ध्यान अपनी ओर खींचा है। सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद निवेशकों का भरोसा इस धातु पर बना हुआ है, लेकिन अब गोल्ड में निवेश का एक नया और ज्यादा फायदेमंद तरीका सामने आया है। सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड न सिर्फ सोने की कीमत बढ़ने का लाभ देते हैं, बल्कि इसके साथ 2.5 प्रतिशत सालाना फिक्स्ड ब्याज भी मिलता है। हाल ही में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने SGB 2018-19 सीरीज-VI के लिए प्रीमैच्योर रिडेम्पशन प्राइस घोषित किया है, जिससे निवेशकों को करीब 377 प्रतिशत तक का शानदार रिटर्न मिला है।

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने 12 फरवरी 2019 को जारी SGB 2018-19 सीरीज-VI ट्रांच के लिए 12 फरवरी 2026 को प्रीमैच्योर रिडेम्पशन प्राइस 15,615 रुपये प्रति यूनिट तय किया है। केंद्रीय बैंक के अनुसार, निवेशक इस ट्रांच को जारी होने की तारीख से पांच साल पूरे होने के बाद ब्याज भुगतान की तारीख पर समय से पहले रिडीम कर सकते हैं। इसका मतलब है कि जिन निवेशकों ने इस बॉन्ड में शुरुआती दौर में निवेश किया था, उन्हें अब बाजार में सोने की कीमत बढ़ने का सीधा फायदा मिल रहा है। SGB की यह खासियत इसे पारंपरिक गोल्ड निवेश से अलग और ज्यादा आकर्षक बनाती है।

SGB की रिडेम्पशन वैल्यू तय करने के लिए एक निर्धारित प्रक्रिया अपनाई जाती है। इसके तहत इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) द्वारा जारी 999 शुद्धता वाले सोने के पिछले तीन कार्यदिवसों के औसत बंद भाव के आधार पर कीमत तय की जाती है। RBI के अनुसार, 12 फरवरी 2026 को मिलने वाली प्रीमैच्योर रिडेम्पशन कीमत 9, 10 और 11 फरवरी 2026 के सोने के औसत बंद भाव के आधार पर 15,615 रुपये प्रति यूनिट निर्धारित की गई है। इस तरह निवेशकों को बाजार की वास्तविक कीमत के अनुसार भुगतान मिलता है।

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड की एक बड़ी खासियत यह है कि इसमें निवेशकों को सोने की कीमत बढ़ने के साथ-साथ 2.5 प्रतिशत सालाना की निश्चित ब्याज दर भी मिलती है। यह ब्याज हर छह महीने में सीधे निवेशक के बैंक खाते में भेजा जाता है। वहीं, मैच्योरिटी के समय अंतिम ब्याज के साथ मूल निवेश राशि भी दी जाती है। यही कारण है कि लंबे समय तक निवेश करने वाले निवेशकों को टैक्स लाभ के साथ बेहतर रिटर्न का फायदा मिल सकता है। हालांकि, जरूरत पड़ने पर निवेशक तय नियमों के तहत समय से पहले भी बॉन्ड रिडीम कर सकते हैं।

रिडेम्पशन के लिए निवेशकों को कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना होता है, जैसे कि अपने बॉन्ड की इश्यू डेट और ट्रांच की जानकारी सही तरीके से जांचना और समय से पहले पैसा निकालने के लिए तय समय सीमा के भीतर आवेदन करना। विशेषज्ञों के अनुसार, SGB उन निवेशकों के लिए बेहतर विकल्प है जो फिजिकल गोल्ड खरीदने की बजाय सुरक्षित और दीर्घकालिक निवेश चाहते हैं। सोने की कीमत में बढ़ोतरी और निश्चित ब्याज के दोहरे लाभ के कारण सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड आज निवेशकों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं।

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