April 20, 2026

सीतापुर में सरकारी स्कूलों में फर्जी शिक्षकों का खुलासा: 16 शिक्षक निकले फर्जी, FIR दर्ज

उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले में एक बड़ा घोटाला सामने आया है, जिसमें सरकारी स्कूलों में काम कर रहे कई शिक्षकों के शैक्षिक प्रमाणपत्र फर्जी पाए गए हैं। जांच के दौरान यह खुलासा हुआ कि 12,460 शिक्षक भर्ती में से 16 शिक्षक के दस्तावेज़ सही नहीं थे। अब शिक्षा विभाग की ओर से इन शिक्षकों के खिलाफ FIR दर्ज कराई जा रही है और उनकी बर्खास्तगी की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

फर्जी शिक्षकों का बड़ा खुलासा

पिछले साल सीतापुर जिले में 1100 शिक्षकों को सहायक अध्यापक के पद पर नियुक्ति मिली थी। इन शिक्षकों की शैक्षिक योग्यता की जांच की जा रही थी, और अब तक करीब 500 शिक्षकों के प्रमाणपत्र की जांच की जा चुकी है। बेसिक शिक्षा अधिकारी के मुताबिक, अभी 600 शिक्षकों के दस्तावेजों की जांच होनी बाकी है। जिन 16 शिक्षकों के प्रमाणपत्र फर्जी पाए गए हैं, उनमें से कई के टीईटी (टीचर्स एलिजिबिलिटी टेस्ट) और डीएलएड (डिप्लोमा इन एलिमेंट्री एजुकेशन) प्रमाणपत्र भी फर्जी थे।

FIR दर्ज: तीन शिक्षकों पर मामला दर्ज

सीतापुर के पिसावां और महोली थानों में तीन शिक्षकों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। पिसावां के प्राथमिक विद्यालय के राहुल कुमार, फखरपुर के अकबर शाह और ढकिया कला के जितेंद्र कुमार के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। इन तीनों शिक्षकों पर आरोप है कि उन्होंने फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर सरकारी नौकरी हासिल की।

इसके अलावा, मिश्रिख के खंड शिक्षा अधिकारी कपिल देव द्विवेदी ने पिसावां थाने में चौखड़िया के प्राथमिक विद्यालय के असिस्टेंट टीचर अरविंद कुमार के खिलाफ भी मामला दर्ज कराया है। आरोप है कि अरविंद कुमार ने फर्जी रिकॉर्ड तैयार कर सरकारी नौकरी प्राप्त की।

नोटिस और बर्खास्तगी की प्रक्रिया

सीतापुर के जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी अखिलेश प्रताप सिंह ने बताया कि सभी 16 फर्जी शिक्षकों को नोटिस जारी किया गया था, लेकिन इनमें से कोई भी शिक्षक अपना पक्ष रखने के लिए नहीं आया। अब इन शिक्षकों के खिलाफ बर्खास्तगी की कार्रवाई शुरू की जाएगी। इसके अलावा, मिश्रिख के खंड शिक्षा अधिकारी कपिल देव द्विवेदी ने भी एक शिक्षक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है। बाकी स्थानों पर भी इसी तरह के मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं।

बढ़ सकती है फर्जी शिक्षकों की संख्या

अभी तक 16 शिक्षक फर्जी पाए गए हैं, लेकिन शिक्षा विभाग का कहना है कि बाकी 600 शिक्षकों के प्रमाणपत्रों की जांच बाकी है, और इस प्रक्रिया के दौरान और भी फर्जी शिक्षकों के नाम सामने आ सकते हैं। यदि इनकी भी जाँच में कोई गड़बड़ी पाई जाती है, तो उनकी संख्या और बढ़ सकती है।

क्या इस घोटाले के पीछे और भी लोग शामिल हैं?

यह मामला तब और गंभीर हो जाता है, जब यह सवाल उठता है कि क्या इस फर्जीवाड़े में अन्य लोग भी शामिल हैं। क्या विभाग के कुछ अधिकारी इस घोटाले में शामिल थे? क्या और भी फर्जी शिक्षकों के प्रमाणपत्र सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज हैं? इन सवालों का जवाब आने वाली जांच में मिलेगा।

सीतापुर जिले में सरकारी स्कूलों में पढ़ा रहे कई मास्टर साहब अब मुसीबत में हैं, और यह घोटाला शिक्षा विभाग के लिए एक बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है कि कैसे इतने बड़े पैमाने पर फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर सरकारी नौकरी दी जा रही थी। यह मामला अब विभाग की जांच और कार्रवाई के लिए एक चुनौती बन चुका है।

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