भारत-अमेरिका के बीच व्यापार वार्ता: 23 बिलियन डॉलर टैरिफ में कटौती की तैयारी
भारत सरकार अमेरिका के साथ अपने व्यापार संबंधों को सुधारने और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए टैरिफ के प्रभाव को कम करने के लिए तैयार है। हाल के दिनों में इस मुद्दे पर मंत्रालयों और विभागों के बीच गहन मंथन हुआ है, और अब भारत सरकार ने एक बड़ा कदम उठाते हुए अमेरिकी आयातों पर 23 बिलियन डॉलर तक के टैरिफ में कटौती करने की तैयारी की है। इस बीच, भारत और अमेरिका के अधिकारी बुधवार से शुरू होने वाली तीन-दिनीय ट्रेड डील वार्ता को लेकर महत्वपूर्ण चर्चा करने के लिए एक साथ बैठेंगे।
भारत सरकार का बड़ा ऐलान: इलेक्ट्रिक वाहन और मोबाइल फोन के निर्माण में राहत
भारत सरकार ने बुधवार को ऐलान किया कि वह अमेरिकी टैरिफ के प्रभाव को कम करने के लिए विभिन्न उत्पादों पर आयात शुल्क में कटौती करेगी। खासतौर पर, इलेक्ट्रिक वाहन बैटरी और मोबाइल फोन के निर्माण में इस्तेमाल होने वाली कई वस्तुओं पर आयात शुल्क में कोई वृद्धि नहीं की जाएगी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में वित्त विधेयक 2025 के पारित होने से पहले यह घोषणा की कि भारत सरकार का लक्ष्य कच्चे माल पर शुल्क कम करके घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना और निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाना है।
अमेरिकी राष्ट्रपति के टैरिफ से निपटने की रणनीति
भारत सरकार का यह कदम अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए जवाबी टैरिफ के प्रभाव को कम करने की एक सटीक रणनीति प्रतीत हो रही है। सूत्रों के अनुसार, भारत 2 अप्रैल से लागू होने वाले अमेरिकी टैरिफ को कम करने के लिए 23 बिलियन डॉलर से अधिक के अमेरिकी आयातों पर शुल्क में कटौती करने के लिए तैयार है। सरकार के एक अधिकारी ने बताया कि नई दिल्ली के लिए यह महत्वपूर्ण है कि वह दोनों देशों के बीच व्यापार विवादों को हल करने के पहले चरण में प्रभावी कदम उठाए, जिससे व्यापार संबंधों में सुधार हो सके।
भारत-अमेरिका के बीच अहम व्यापार वार्ता शुरू
इस मामले पर भारत और अमेरिका के अधिकारी बुधवार से तीन दिन तक गहन चर्चा करेंगे। अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व दक्षिण एवं पश्चिम एशिया के लिए सहायक व्यापार प्रतिनिधि ब्रैंडन लिंच कर रहे हैं, जो इस समय भारत में हैं। भारत के वाणिज्य विभाग के अतिरिक्त सचिव राजेश अग्रवाल के साथ उनकी बैठक होगी, जहां दोनों पक्ष द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर चर्चा करेंगे। सूत्रों के मुताबिक, इस समझौते में वस्तु व्यापार, आयात शुल्क, और दोनों देशों के बीच निवेश को बढ़ावा देने के लिए साझा दिशा-निर्देशों पर बातचीत की जाएगी।
पहले चरण में वस्तु व्यापार पर जोर
समझौते का पहला चरण वस्तु व्यापार से संबंधित मुद्दों पर केंद्रित रहेगा। इस चरण में, दोनों देशों के बीच व्यापार में 90-95 प्रतिशत उत्पादों पर आयात शुल्क में भारी कटौती की संभावना है। भारतीय अधिकारियों का कहना है कि यह समझौता विशेष रूप से उन उत्पादों पर ध्यान केंद्रित करेगा, जो दोनों देशों के लिए आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण हैं। इसमें भारत अपने कपड़ा क्षेत्र, कृषि और श्रम-निर्भर उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए शुल्क में कटौती करने पर विचार कर सकता है, जबकि अमेरिका अपने औद्योगिक वस्त्र, वाहनों और शराब के लिए अधिक बाजार पहुंच की मांग कर सकता है।
पीयूष गोयल का अमेरिका दौरा
भारत सरकार ने व्यापार समझौते को लेकर अमेरिका के साथ गंभीरता से बातचीत शुरू की है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने मार्च में वाशिंगटन का दौरा किया और अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर एवं वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लुटनिक के साथ बैठक की थी। इस दौरान, दोनों पक्षों ने आपसी सहयोग और द्विपक्षीय व्यापार बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की थी। अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि इस बार की वार्ता से दोनों देशों के बीच निष्पक्ष और संतुलित व्यापार बढ़ाने में मदद मिलेगी।
भारत को मिली राहत, ट्रंप खुश हो सकते हैं
इस बीच, भारत सरकार द्वारा 23 बिलियन डॉलर के अमेरिकी आयातों पर टैरिफ में कटौती की संभावना, और इलेक्ट्रिक वाहन बैटरी और मोबाइल फोन निर्माण के लिए राहत देने का कदम अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को खुश कर सकता है। यह कदम भारत सरकार के लिए अपनी स्थिति को मजबूत करने का अवसर प्रदान करेगा, और अमेरिका के साथ होने वाली आगामी ट्रेड डील में भारत का ग्राउंड मजबूत हो सकता है।
इस समझौते के जरिए भारत और अमेरिका के बीच व्यापार में नई संभावनाएं उत्पन्न हो सकती हैं, और दोनों देशों के लिए आर्थिक अवसर बढ़ सकते हैं। यह कदम न केवल व्यापार संबंधों को सुधारने में मदद करेगा, बल्कि दोनों देशों के बीच व्यापार की रचनात्मक, न्यायसंगत और दूरदर्शी संभावनाओं को भी खोल सकता है।
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