भारत: 22 राज्यों में अप्रैल से शुरू हो सकती है SIR प्रक्रिया, चुनाव आयोग ने तैयारियां तेज करने के दिए निर्देश
देश के 22 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया अप्रैल से शुरू किए जाने की तैयारी चल रही है। भारत निर्वाचन आयोग ने इस संबंध में सभी संबंधित राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (CEO) को पत्र भेजकर आवश्यक तैयारियां पूरी रखने के निर्देश दिए हैं। संभावना जताई जा रही है कि 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाएं समाप्त होने के बाद इस प्रक्रिया की औपचारिक घोषणा की जा सकती है। खास तौर पर वोटरों की मैपिंग और संबंधित दस्तावेजों के सत्यापन जैसे कार्य पहले से ही पूरा करने पर जोर दिया गया है, ताकि प्रक्रिया शुरू होने पर अतिरिक्त दबाव से बचा जा सके।
अधिकारियों के अनुसार, पहले चरण में बिहार में और दूसरे चरण में पश्चिम बंगाल समेत 12 राज्यों में यह प्रक्रिया पहले से ही जारी है। इन चरणों के पूरा होने के बाद तीसरे चरण में बाकी राज्यों को शामिल किया जाएगा। दिल्ली, हरियाणा और महाराष्ट्र सहित कई बड़े राज्यों में अप्रैल से इस प्रक्रिया के शुरू होने की संभावना है। अधिकारियों का कहना है कि बोर्ड परीक्षाओं के दौरान बड़ी संख्या में शिक्षक चुनावी कार्यों में लगाए जाते हैं, इसलिए परीक्षाएं समाप्त होने के बाद ही इस अभियान को आगे बढ़ाने की योजना बनाई गई है।
चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक अब तक 13 राज्यों में करीब 61 करोड़ से अधिक मतदाता इस विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया में शामिल हो चुके हैं। आगामी तीसरे चरण में लगभग 37 से 38 करोड़ मतदाताओं को इस प्रक्रिया से जोड़ा जाएगा। इस चरण में कर्नाटक और आंध्र प्रदेश जैसे बड़े राज्यों को भी शामिल किए जाने की संभावना है। आयोग का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाना है, ताकि चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता और विश्वसनीयता सुनिश्चित की जा सके।
चुनाव आयोग के अधिकारियों का कहना है कि पहले और दूसरे चरण में सामने आई समस्याओं से सबक लेते हुए तीसरे चरण में प्रक्रिया को और सरल बनाया जाएगा। मतदाताओं और बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) को कम से कम दिक्कतों का सामना करना पड़े, इसके लिए कई नई व्यवस्थाएं लागू की जा रही हैं। दस्तावेजों की कमी से जुड़े मामलों में मतदाताओं को बार-बार अधिकारियों के सामने पेश होने की जरूरत कम होगी और कई सेवाएं घर बैठे उपलब्ध कराई जा सकेंगी। कुछ राज्यों में इस व्यवस्था को परीक्षण के तौर पर लागू भी किया जा चुका है।
वहीं असम में SIR प्रक्रिया लागू करने की मांग से जुड़ी एक जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से इनकार कर दिया है। अदालत ने माना कि राज्य की अंतिम मतदाता सूची पहले ही प्रकाशित की जा चुकी है, इसलिए इस मामले में हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है। चुनाव आयोग ने भी अदालत को बताया कि अंतिम मतदाता सूची जारी होने के बाद याचिका निष्प्रभावी हो चुकी है। इस फैसले के बाद अन्य राज्यों में प्रस्तावित तीसरे चरण की तैयारियों पर अब आयोग का पूरा ध्यान केंद्रित है।
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