April 30, 2026

रेस्टलेस लेग सिंड्रोम – जब नींद में भी पैर न रुके

क्या आपने कभी रात को सोते समय अपने पैरों में अजीब-सी बेचैनी महसूस की है? ऐसा लगा हो कि पैर अपने आप हिल रहे हैं? या फिर ऐसा हो कि आपको हर थोड़ी देर में पैरों को हिलाना पड़े, वरना आराम नहीं मिलता? अगर हां, तो यह कोई साधारण थकान या टेंशन नहीं… बल्कि रेस्टलेस लेग सिंड्रोम भी हो सकता है।

रेस्टलेस लेग सिंड्रोम यानी RLS, एक न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर है जो खासकर रात के समय सोने से पहले या सोने के दौरान असर दिखाता है। इसमें व्यक्ति को पैरों में खुजली, जलन, चुभन या कंपन जैसा अजीब सा एहसास होता है और उसे पैरों को लगातार हिलाते रहने की इच्छा होती है। इस वजह से नींद बार-बार टूटती है और अगली सुबह शरीर थका हुआ महसूस करता है।

दिल्ली के मैक्स साकेत अस्पताल में न्यूरोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. दलजीत सिंह बताते हैं कि RLS की अनदेखी करना खतरनाक हो सकता है क्योंकि यह सिर्फ पैरों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरे शरीर और दिमाग की नींद से जुड़ी प्रणाली को प्रभावित करता है।

इस बीमारी के पीछे कई कारण हो सकते हैं। सबसे आम कारण है—शरीर में आयरन की कमी। आयरन की कमी से दिमाग में डोपामिन नामक न्यूरोकेमिकल प्रभावित होता है, जो शरीर की गति और संतुलन को नियंत्रित करता है। इसके अलावा डायबिटीज़, किडनी की बीमारी, या न्यूरोपैथी जैसी स्थितियां भी इसे बढ़ावा दे सकती हैं। कुछ मामलों में यह पार्किंसन डिज़ीज, गर्भावस्था के अंतिम महीनों, या फिर नींद की कमी और अनियमित जीवनशैली के चलते भी होता है।

कई बार यह समस्या परिवार में आनुवंशिक रूप से भी देखी जाती है और कुछ दवाइयों के साइड इफेक्ट्स से भी यह सिंड्रोम ट्रिगर हो सकता है।

लक्षणों में पैरों में झनझनाहट, गुदगुदी, जलन, या बार-बार उठकर चलने की इच्छा शामिल होती है। नींद अधूरी रह जाती है, जिससे दिन में थकावट, चिड़चिड़ापन, यहां तक कि डिप्रेशन भी हो सकता है।

अब सवाल ये है कि इसका इलाज क्या है?
अगर आप इस समस्या से जूझ रहे हैं तो सबसे पहला कदम है डॉक्टर से परामर्श लेना और शरीर में आयरन की जांच कराना। यदि कमी पाई जाए तो आयरन सप्लीमेंट्स लेना बेहद जरूरी है। इसके अलावा, कैफीन, शराब और धूम्रपान से दूरी बनाना चाहिए। रात को सोने से पहले पैरों की हल्की मसाज या स्ट्रेचिंग करने से भी राहत मिल सकती है।

सबसे जरूरी है—नियमित नींद का पैटर्न अपनाना। दिनचर्या को संतुलित करें, स्क्रीन टाइम को कम करें और रात्रि के समय शांत वातावरण में सोने की आदत डालें।

याद रखें, नींद सिर्फ एक फिजिकल रेस्ट नहीं, बल्कि मानसिक सुकून भी है। और अगर पैरों की बेचैनी आपकी नींद छीन रही है, तो ये वक्त है सजग होने का।

रेस्टलेस लेग सिंड्रोम को अनदेखा करना यानी खुद को अनजाने में थकावट, तनाव और बीमारियों की ओर धकेलना है। सही समय पर जांच और उपचार से इस समस्या से राहत पाना पूरी तरह संभव है।

इसलिए अगली बार जब आपकी नींद बार-बार टूटे और पैर खुद-ब-खुद हिलने लगें, तो इसे नजरअंदाज न करें। क्योंकि हर रात की अच्छी नींद ही, हर दिन की अच्छी शुरुआत है।

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