April 17, 2026

भारत में शिक्षा प्रणाली पर सवाल: क्या गिरावट का कारण है सरकार की नीतियां या कुछ और?

लोकसभा में आरजेडी के सांसद अभय कुशवाहा ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण सवाल उठाया, जिसमें उन्होंने स्कूलों में दलित, आदिवासी और OBC छात्रों की संख्या में गिरावट को लेकर सरकार से जवाब मांगा। शिक्षा मंत्रालय के राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने इस सवाल का जवाब दिया और साथ ही आंकड़ों के जरिए बताया कि साल 2023 और 2024 में छात्रों की संख्या में क्या बदलाव आया है और इस गिरावट के कारण क्या हो सकते हैं।

समान शिक्षा के उद्देश्य पर जोर
सवाल के जवाब में, राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने कहा कि केंद्र सरकार नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (एनईपी 2020) को लागू कर शिक्षा के क्षेत्र में समावेशिता को बढ़ावा देने का प्रयास कर रही है। उनका दावा है कि यह नीति 2030 तक सभी बच्चों को समान और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने का लक्ष्य रखती है। केंद्र सरकार ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को समग्र शिक्षा योजना के तहत वित्तीय सहायता देने का भी ऐलान किया है। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सभी बच्चों को उनकी विविध पृष्ठभूमि, बहुभाषी जरूरतों, और शैक्षणिक क्षमताओं को ध्यान में रखते हुए बेहतर शिक्षा मिले।

साल 2023-24 में स्कूलों में गिरावट
एक अन्य सवाल के जवाब में चौधरी ने बताया कि साल 2023-24 में स्कूलों में एडमिशन की संख्या में गिरावट आई है, जिसमें कुल 37 लाख छात्रों की कमी आई है। उन्होंने बताया कि यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इनफार्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन प्लस (UDISE+) ने 2022-23 और 2023-24 के आंकड़ों का तुलनात्मक अध्ययन किया है। इसके मुताबिक, 2022-23 में प्री-प्राइमरी से हायर सेकेंडरी तक कुल 25 करोड़, 17 लाख, 91 हजार, 722 नामांकन थे, जबकि 2023-24 में यह संख्या घटकर 24 करोड़, 80 लाख, 45 हजार, 828 रह गई। यह गिरावट विशेष रूप से कुछ वर्गों में अधिक देखने को मिली है।

क्या कारण है ये गिरावट?
चौधरी ने स्पष्ट किया कि गिरावट का मुख्य कारण कुछ सामाजिक और आर्थिक बदलावों के कारण हो सकता है। विशेष रूप से अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी), और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के छात्रों के लिए यह गिरावट स्पष्ट रूप से नजर आई। 2022-23 में एससी वर्ग में 4 करोड़, 44 लाख, 25 हजार, 208 नामांकन थे, जो 2023-24 में घटकर 4 करोड़, 28 लाख, 1 हजार, 577 रह गए। एसटी वर्ग में भी इसी प्रकार की कमी देखी गई, जहां 2022-23 में 2 करोड़, 39 लाख, 56 हजार, 131 नामांकन थे, और 2023-24 में यह घटकर 2 करोड़, 34 लाख, 41 हजार, 706 रह गए। ओबीसी छात्रों में भी गिरावट आई, जहां 2022-23 में 11 करोड़, 4 लाख, 3 हजार, 611 छात्रों ने एडमिशन लिया था, वहीं 2023-24 में यह संख्या घटकर 10 करोड़, 65 लाख, 50 हजार, 283 रह गई।

छात्राओं की संख्या में भी कमी
सरकार ने यह भी बताया कि छात्राओं की संख्या में भी गिरावट आई है। 2022-23 में 11 करोड़, 62 लाख, 9 हजार, 112 छात्राओं का नामांकन था, जो 2023-24 में घटकर 11 करोड़, 32 लाख, 48 हजार, 84 रह गया।

इस गिरावट पर लगातार चिंता जताई जा रही है, और सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह गिरावट केंद्र सरकार की नीतियों की वजह से हो रही है, या फिर कुछ अन्य कारण हैं जिनकी वजह से इस असमानता को लेकर चिंताएं पैदा हो रही हैं। यह देखने वाली बात होगी कि क्या सरकार आने वाले समय में इन आंकड़ों को सुधारने के लिए कोई कदम उठाती है या नहीं।

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