पहलगाम हमला या मानवता पर हमला? सिक्किम नहीं जा सके पीएम मोदी, लेकिन ऑपरेशन सिंदूर से आतंकियों को दिया करारा जवाब
29 मई की सुबह… देशभर में सुरक्षा व्यवस्था और मौसम को लेकर अलर्ट था। एक ओर कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले ने पूरे देश को झकझोर दिया था, वहीं दूसरी ओर सिक्किम में राज्य स्थापना की 50वीं वर्षगांठ पर एक भव्य कार्यक्रम की तैयारी थी, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को शामिल होना था। लेकिन प्रकृति का मिजाज कुछ और ही था। खराब मौसम की वजह से प्रधानमंत्री मोदी का सिक्किम दौरा रद्द हो गया।
हालांकि यह उनका पीछे हटना नहीं था—बल्कि उन्होंने वर्चुअल माध्यम से सिक्किम की जनता से सीधा संवाद किया और एक मजबूत संदेश भी दिया, जो सिर्फ सिक्किम ही नहीं, बल्कि पूरे देश को संबोधित था। उन्होंने पहलगाम आतंकी हमले की कड़ी निंदा करते हुए इसे “सिर्फ भारत पर नहीं, बल्कि पूरी मानवता पर हमला” करार दिया।
पीएम मोदी ने साफ कहा, “ऑपरेशन सिंदूर के ज़रिए भारत ने आतंकियों को ऐसा जवाब दिया है, जिससे उनके अड्डे तबाह हो गए हैं और उनके सरपरस्त देशों की पोल पूरी दुनिया के सामने खुल गई है।”
सिक्किम की जनता को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री भावुक दिखे। उन्होंने कहा कि 50 साल पहले सिक्किम ने लोकतंत्र को अपनाया और आज उसका हर परिवार प्रगति और आत्मविश्वास से भरा है। उन्होंने गंगटोक में आयोजित कार्यक्रम की तारीफ करते हुए कहा, “आपने इतना शानदार आयोजन किया है कि मैं वहां मौजूद न होते हुए भी उसका गौरव महसूस कर रहा हूं।”
पीएम मोदी ने सिक्किम की प्राकृतिक और सांस्कृतिक धरोहरों का उल्लेख करते हुए कहा, “यहां झीलें हैं, झरने हैं, अध्यात्म है, और यूनेस्को द्वारा मान्यता प्राप्त कंचनजंगा नेशनल पार्क भी है।” उन्होंने यह भी बताया कि स्वर्ण जयंती के मौके पर जो परियोजनाएं शुरू की जा रही हैं—जैसे नया स्काईवॉक, अटल जी की प्रतिमा और अन्य प्रोजेक्ट—वे सिक्किम की नई ऊंचाइयों की प्रतीक हैं।
प्रधानमंत्री ने अपने भाषण के अंत में एक बार फिर देश को यह भरोसा दिलाया कि भारत आतंक के खिलाफ न सिर्फ सतर्क है, बल्कि पूरी ताक़त से जवाब देने में सक्षम है। उन्होंने कहा, “हम पहले से कहीं अधिक एकजुट हैं। आतंकियों और उनके मददगारों को हमने ये साफ संदेश दिया है कि भारत न सिर्फ तेजी से वार करता है, बल्कि सटीकता से जवाब भी देता है।”
इस पूरे घटनाक्रम ने यह साबित कर दिया कि चाहे मौसम कितना भी खराब हो, चाहे परिस्थितियाँ कितनी भी प्रतिकूल हों—भारत का नेतृत्व पीछे नहीं हटता। वह न सिर्फ संवाद करता है, बल्कि साहस और संकल्प के साथ दुश्मनों को जवाब भी देता है।
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