May 1, 2026

श्रीलंका के पूर्व राष्ट्रपति विक्रमसिंघे ICU में भर्ती, गिरफ्तारी के बाद बिगड़ी तबीयत

श्रीलंका के पूर्व राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे की तबीयत अचानक बिगड़ने के बाद उन्हें कोलंबो नेशनल हॉस्पिटल के ICU में भर्ती कराया गया है। 22 अगस्त को सरकारी धन के दुरुपयोग के आरोप में गिरफ्तार किए गए 76 वर्षीय विक्रमसिंघे को डिहाइड्रेशन, हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज की समस्या है। अस्पताल प्रशासन ने बताया कि उन्हें गंभीर हालत में ICU लाया गया था, जहां डॉक्टरों की निगरानी में उनका इलाज चल रहा है। फिलहाल उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है।

 

दरअसल, कोलंबो फोर्ट मजिस्ट्रेट कोर्ट ने पूर्व राष्ट्रपति को 26 अगस्त तक रिमांड पर भेजा था। इसके बाद उन्हें शुक्रवार देर रात मैगजीन रिमांड जेल में शिफ्ट किया गया था। लेकिन जेल की हेल्थ फैसिलिटी में पर्याप्त चिकित्सा सुविधा न होने की वजह से उनकी हालत और बिगड़ गई, जिसके चलते उन्हें तुरंत अस्पताल भेजा गया। जेल प्रशासन ने भी पुष्टि की है कि आपात स्थिति के कारण उन्हें ICU ले जाया गया।

 

गौरतलब है कि विक्रमसिंघे पर सितंबर 2023 में सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग करने का आरोप है। उस समय वह क्यूबा के हवाना में आयोजित G77 सम्मेलन में शामिल हुए थे। हालांकि, वहां से लौटते वक्त उन्होंने लंदन में रुककर अपनी पत्नी के दीक्षांत समारोह में हिस्सा लिया। CID का आरोप है कि यह यात्रा निजी कारणों से की गई थी, लेकिन पूरे खर्च का भुगतान सरकारी खजाने से किया गया। इसी मामले में उन्हें गिरफ्तार किया गया है।

 

विक्रमसिंघे की यूनाइटेड नेशनल पार्टी (UNP) ने सरकार पर साजिश रचने का आरोप लगाया है। पार्टी महासचिव थलथा अथुकोरला ने कहा कि सरकार को डर है कि पूर्व राष्ट्रपति राजनीतिक रूप से फिर से सक्रिय होकर सत्ता में लौट सकते हैं। इसलिए उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। UNP का यह भी कहना है कि मात्र 2 सीटों वाली उनकी पार्टी संसद में कमजोर जरूर है, लेकिन विक्रमसिंघे की लोकप्रियता और प्रभाव अभी भी सत्ता पक्ष को असहज करता है।

 

सितंबर 2024 में हुए राष्ट्रपति चुनाव में विक्रमसिंघे को अनुरा कुमारा दिसानायके से हार का सामना करना पड़ा था। इसके बावजूद वह राजनीति में सक्रिय बने रहे और विभिन्न मुद्दों पर सरकार की आलोचना करते रहे। यही वजह रही कि करप्शन विरोधी अभियान के तहत उन्हें गिरफ्तार किया गया। इस बीच, उनकी गिरफ्तारी और तबीयत बिगड़ने को लेकर श्रीलंका की राजनीति और ज्यादा गर्मा गई है। विपक्षी दलों का आरोप है कि सत्ता पक्ष अपने विरोधियों को दबाने के लिए प्रशासनिक और कानूनी हथकंडे अपना रहा है।

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