April 30, 2026

भारत के पड़ोसी श्रीलंका में गहराया नमक संकट, दिल्ली ने बढ़ाया मदद का हाथ, युद्धकाल में भी निभाया था साथ

श्रीलंका, जो कभी अपनी प्राकृतिक सुंदरता और सांस्कृतिक विरासत के लिए जाना जाता था, इन दिनों एक गंभीर संकट से गुजर रहा है। इस बार संकट किसी राजनीतिक मुद्दे का नहीं, बल्कि एक बुनियादी आवश्यक वस्तु — नमक — का है। देश में भारी बारिश के चलते नमक का उत्पादन पूरी तरह से ठप हो गया है। जो नमक पहले से उत्पादित किया गया था, वह बारिश में बह गया, जिससे देश में अब जरूरत भर का नमक भी नहीं बचा है।

इस संकट ने आम जनता की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। लोग बाजारों में नमक खरीदने के लिए संघर्ष कर रहे हैं और इसकी कीमतें आसमान छू रही हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार श्रीलंका में इस समय नमक की कीमतें सामान्य से तीन से चार गुना बढ़ गई हैं। कुछ क्षेत्रों में यह कीमत 145 रुपये प्रति किलो तक पहुंच चुकी है। स्थिति इतनी गंभीर है कि कालाबाजारी शुरू हो गई है और नमक का कृत्रिम अभाव पैदा कर मुनाफाखोरी हो रही है।

श्रीलंकाई मीडिया के मुताबिक देश अपनी वास्तविक जरूरत का केवल 23% नमक ही खुद उत्पादन कर पा रहा है। बाकी की जरूरत आयात से पूरी होती है। ऐसे संकट की घड़ी में भारत एक बार फिर अपने पुराने मित्र और पड़ोसी देश के समर्थन में खड़ा हुआ है। भारत ने अब तक 3,050 मीट्रिक टन नमक श्रीलंका भेजने का निर्णय लिया है, जो वहां की जनता को तत्काल राहत देने में मदद करेगा।

यह पहली बार नहीं है जब भारत ने श्रीलंका की मदद की हो। दो साल पहले जब देश गंभीर आर्थिक संकट में डूबा था, तब भी भारत ने ईंधन, दवाइयों और खाद्यान्न की आपूर्ति कर श्रीलंका की सहायता की थी। इतना ही नहीं, इतिहास गवाह है कि जब श्रीलंका 1971 में आंतरिक संकटों और विद्रोहों से जूझ रहा था, तब भी भारत ने अपनी नौसेना भेजकर शांति बनाए रखने में भूमिका निभाई थी।

भारत की यह मदद केवल मानवीय आधार पर नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और क्षेत्रीय एकजुटता के प्रतीक के रूप में देखी जा रही है। यह संदेश स्पष्ट है — संकट की घड़ी में भारत अपने पड़ोसी देशों को कभी अकेला नहीं छोड़ता।

Share this content:

About The Author

error: Content is protected !!