April 19, 2026

तंगहाली से पद्मश्री तक: शशिकला सहगल की जिंदगी का उतार-चढ़ाव भरा सफर

बॉलीवुड की बेहतरीन अदाकाराओं में शुमार रहीं शशिकला सहगल ने फिल्मों में अपने नेगेटिव किरदारों से दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई। मगर फिल्मी दुनिया तक पहुंचने का उनका रास्ता आसान नहीं था। एक वक्त ऐसा भी आया जब उन्हें डबल शिफ्ट्स में काम करना पड़ा, लेकिन फिर भी उन्हें आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ा। बड़े पर्दे पर अमरीश पुरी, अमजद खान जैसे खलनायकों के साथ-साथ शशिकला जैसी महिला कलाकारों ने भी अपने प्रभावशाली अभिनय से दर्शकों पर छाप छोड़ी। उन्होंने ‘गुमराह’, ‘हरियाली और रास्ता’, ‘फूल और पत्थर’ जैसी कई हिट फिल्मों में काम किया और अपनी अदायगी का लोहा मनवाया।

शशिकला ने मात्र 19 साल की उम्र में ओपी सहगल से शादी कर ली थी, लेकिन शादी के बाद किस्मत ने उनका साथ नहीं दिया। पति का कारोबार डूबने लगा और शशिकला की आमदनी भी बहुत कम थी। घर चलाने के लिए उन्होंने दिन-रात काम करना शुरू कर दिया। फिल्म ‘जीनत’ से शुरुआत करने वाली शशिकला को उस समय सिर्फ 25 रुपये मिले थे। जरूरतों की पूर्ति के लिए उन्होंने डबल शिफ्ट्स में भी काम किया, लेकिन तंगी इतनी बढ़ गई कि उनकी बेटी भी शिकायतें करने लगी।

एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि उनके दौर के कई कलाकार आगे निकल गए जबकि वह वहीं की वहीं रह गईं, और इसकी एक बड़ी वजह उनका शादीशुदा होना था। निजी जीवन में तनाव बढ़ने पर उन्होंने अपने पति और बच्चों को छोड़ विदेश की राह ली, जिसे बाद में उन्होंने अपनी सबसे बड़ी गलती माना। भारत लौटने पर उनके पास न घर था, न काम। उन्होंने आश्रम और मंदिरों में दिन गुजारे। फिल्मों में काम ना मिलने पर उन्होंने टीवी की ओर रुख किया और ‘सोनपरी’ में फ्रूटी की दादी का किरदार निभाया, जिससे उन्हें एक बार फिर पहचान मिली।

शशिकला के संघर्षों को भारत सरकार ने भी सराहा और साल 2007 में उन्हें पद्मश्री से नवाजा गया। उन्होंने ‘नौ दो ग्यारह’, ‘जंगली’, ‘ये रास्ते हैं प्यार के’, ‘दुल्हन वही जो पिया मन भाए’, ‘नीलकमल’, ‘पैसा या प्यार’, ‘कभी खुशी कभी ग़म’ और ‘मुझसे शादी करोगी’ जैसी फिल्मों में अपनी छवि को और मजबूत किया।

शशिकला सहगल ने अपने जीवन का लंबा समय सिनेमा को समर्पित किया और 4 अप्रैल 2021 को दुनिया को अलविदा कह दिया। 50 से 70 के दशक तक सिल्वर स्क्रीन पर राज करने वाली यह अदाकारा एक मिसाल बन गईं कि कैसे संघर्षों के बीच भी कोई अपनी पहचान बना सकता है।

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